नई दिल्ली: देश भर में लंबे समय से अटके हुए और अधर में लटके रियल एस्टेट (Housing) प्रोजेक्ट्स के घर खरीदारों द्वारा लगातार दायर की जा रही अलग-अलग याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने गहरी चिंता व्यक्त की है। अदालत ने स्पष्ट रूप से टिप्पणी की है कि यदि देश के प्रत्येक समस्याग्रस्त हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़े मामलों की अलग-अलग सुनवाई करने का सिलसिला शुरू कर दिया गया, तो मुख्य और व्यापक मामले पर अंतिम फैसला सुना पाना बेहद कठिन हो जाएगा। मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने दो टूक शब्दों में कहा कि भारत जैसे विशाल देश में हर एक अटके हुए हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए सुप्रीम कोर्ट कोई सुनवाई का इकलौता मंच या फोरम नहीं बन सकता। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि मुख्य मामले पर आने वाला उसका आगामी फैसला अन्य संबंधित विवादों से निपट रहे देश के सभी उच्च न्यायालयों (High Courts) के लिए एक मजबूत मार्गदर्शक और दिशा-निर्देश का कार्य करेगा।
CJI सूर्यकांत की दो टूक: ‘यदि एक प्रोजेक्ट के खरीदार आएंगे, तो सैकड़ों लोग पहुंचेंगे; अंतहीन हो जाएगी सुनवाई की प्रक्रिया’
इस मामले की सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की ओर से यह दलील पेश की गई कि वर्तमान में जिन हाउसिंग प्रोजेक्ट्स का जिक्र किया जा रहा है, वे तकनीकी रूप से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन मुख्य मामले का हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि ऐसे प्रोजेक्ट्स को बिल्डरों द्वारा पूरी तरह छोड़ दिया गया है, जिसके कारण बे-घर हुए खरीदारों को किसी भी प्रकार की राहत नहीं मिल पा रही है। इस पर सीजेआई (CJI) सूर्यकांत ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी एक विशेष प्रोजेक्ट के खरीदार सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने लगेंगे, तो उसी एक प्रोजेक्ट से जुड़े 200 अन्य लोग भी अलग से याचिका लेकर यहां आ सकते हैं। ऐसी स्थिति में मामलों की सुनवाई और उसके निपटारे की प्रक्रिया कभी समाप्त ही नहीं होगी। उन्होंने याचिकाकर्ताओं को सलाह दी कि उन्हें मुख्य मामले के फैसले का धैर्यपूर्वक इंतजार करना चाहिए या फिर अपनी स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय का रुख करना चाहिए।
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने दी हाईकोर्ट के असमंजस की दलील, CJI ने स्पष्ट किया कानूनी रुख
सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत के संज्ञान में यह बात लाई कि विभिन्न राज्यों के उच्च न्यायालय इन मामलों में कोई ठोस निर्णय लेने से बच रहे हैं क्योंकि वे खुद सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं, तो CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं को भी उसी मुख्य फैसले की प्रतीक्षा करनी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि असली समस्या यह है कि जैसे ही इस अदालत द्वारा ऐसे किसी मामले में नोटिस जारी किया जाता है, देश भर के अन्य तमाम अटके हुए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स से जुड़े लोग भी तुरंत यहां पहुंचने लगते हैं, जिससे मुख्य और महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई अनावश्यक रूप से प्रभावित होती है। इसके पश्चात, वकील ने अदालत से अनुरोध किया कि इस मामले को आगामी 26 नवंबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया जाए।
‘मुख्य फैसले के बाद भी खुले रहेंगे राहत के रास्ते’, विरोधाभासी फैसलों पर कोर्ट ने दी अहम टिप्पणी
CJI सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता के वकील से सीधे तौर पर यह सवाल किया कि वे इस शुरुआती चरण में अपनी याचिका वापस क्यों नहीं ले लेते। उन्होंने आश्वासन दिया कि जब मुख्य मामले पर अदालत का अंतिम फैसला आ जाएगा, तब भी याचिकाकर्ताओं के पास यह कानूनी विकल्प खुला रहेगा कि वे सुप्रीम कोर्ट या संबंधित उच्च न्यायालय में जाकर राहत की गुहार लगा सकें। इसके जवाब में वकील ने दलील दी कि देश के अलग-अलग उच्च न्यायालय पहले ही इन जमीनी विवादों पर अपनी-अपनी अलग और विरोधाभासी राय दे चुके हैं, जिसके कारण ऐसी असहज स्थितियां बन रही हैं और मामले सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच रहे हैं। इस पर CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि एक बार जब देश की शीर्ष अदालत किसी कानूनी बिंदु या मामले पर अपनी स्पष्ट राय और फैसला दे देती है, तो देश का कोई भी उच्च न्यायालय उससे अलग या विपरीत राय नहीं अपना सकता।
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