पश्चिम बंगाल में जब भी विधानसभा चुनाव होते हैं, हिंसा की आशंका बनी रहती है. इस चिंता को दूर करने के लिए चुनाव आयोग निष्पक्ष और स्वतंत्र मतदान सुनिश्चित करने हेतु कड़े कदम उठा रहा है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मतदाताओं को आश्वस्त किया कि चुनाव भयमुक्त वातावरण में कराए जाएंगे. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह प्रक्रिया हिंसामुक्त, धमकीमुक्त, फर्जी मतदान से मुक्त होगी और इसमें बूथ कैप्चरिंग या किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं होगा.
चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मतदान अधिकारियों और पीठासीन अधिकारियों को अत्यधिक सतर्क रहने और नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. आयोग ने चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार के उल्लंघन पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी. चुनाव आयोग मतदान केंद्रों पर AI से लैस सीसीटीवी कैमरे भी स्थापित करता है और हरेक मतदान केंद्र यानी बूथ की इन कैमरों से रिकॉर्डिंग करायी जाती है.
बूथ कैप्चरिंग और हिंसा पर EC कराएगा Repoll
लोक प्रतिनिधित्व कानून की धारा 58ए के तहत चुनाव आयोग को बूथ कैप्चरिंग के मामलों में चुनाव स्थगित करने या रद्द करने का अधिकार भी है. रिटर्निंग ऑफिसर की रिपोर्ट की समीक्षा के बाद, चुनाव आयोग चुनाव को अमान्य घोषित कर सकता है और नए सिरे से चुनाव कराने का आदेश दे सकता है. चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार यदि किसी भी मतदान केंद्र पर बूथ कैप्चरिंग की सूचना मिलती है, तो फिर से वोटिंग कराई जाएगी. ऐसे में अगर इस तरह की स्थिति बनती है तो पहले चरण के लिए दोबारा मतदान 25 अप्रैल और 27 अप्रैल को होने की उम्मीद है, जबकि दूसरे चरण के लिए यह 1 मई और 3 मई को हो सकता है.
शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने पहले ही मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), गृह सचिव, कोलकाता पुलिस आयुक्त और अतिरिक्त महानिदेशक (कानून और व्यवस्था) सहित कई शीर्ष अधिकारियों के साथ-साथ सैकड़ों पुलिस अधिकारियों का तबादला कर दिया है. पश्चिम बंगाल में सीएपीएफ की अब तक की सबसे अधिक तैनाती देखी जा रही है, जिसमें लगभग 2,400 कंपनियां तैनात की गई हैं. 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान लगभग 3.4 लाख सीएपीएफ कर्मियों की तैनाती की गई थी.
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