Sirsa Kinnow GI Tag: हरियाणा के सिरसा को मिली बड़ी पहचान, किन्नू को मिला प्रतिष्ठित GI टैग

हरियाणा

हरियाणा के लिए गर्व का विषय है कि सिरसा जिले के किन्नू को अब आधिकारिक रूप से GI (Geographical Indication) टैग प्राप्त हो गया है। यह सम्मान न केवल सिरसा के किसानों की मेहनत का फल है, बल्कि यह हरियाणा की समृद्ध कृषि विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने में एक मील का पत्थर साबित होगा। GI टैग मिलने से अब सिरसा का किन्नू अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक विशिष्ट ब्रांड के रूप में जाना जाएगा।

🚜 सिरसा: किन्नू का सबसे बड़ा गढ़

सिरसा जिला हरियाणा में किन्नू उत्पादन में अग्रणी है। यहाँ लगभग 13 हजार हेक्टेयर भूमि पर किन्नू के बाग फैले हुए हैं। जिला बागवानी अधिकारी दीन मोहम्मद के अनुसार, जिले में प्रतिवर्ष 1 लाख 80 हजार 508 मीट्रिक टन किन्नू का उत्पादन होता है, जिसमें डबवाली खंड सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहाँ की विशेष जलवायु और मिट्टी ही है जो यहाँ के किन्नू को अन्य स्थानों से अलग, बेहद चमकदार, रसीला और स्वादिष्ट बनाती है।

📜 क्या है GI टैग और इसके मायने?

GI टैग (Geographical Indication) किसी उत्पाद को उसकी विशेष गुणवत्ता, स्वाद या विशिष्टता के लिए दिया जाता है, जो किसी खास भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी होती है। यह टैग उत्पाद को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है और नकल पर रोक लगाता है। हरियाणा के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि इससे पहले हरियाणा को बासमती चावल और फुलकारी के लिए संयुक्त रूप से GI टैग मिले थे, लेकिन सिरसा के किन्नू को ‘स्वतंत्र’ GI टैग मिला है।

📈 किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हरियाणा सरकार किसानों की आय बढ़ाने और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस टैग के मिलने से किसानों को अपने उत्पाद का उचित मूल्य मिलेगा, बिचौलियों का प्रभाव कम होगा और अंतरराष्ट्रीय निर्यात के नए रास्ते खुलेंगे।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry