किशनगंज/पूर्णिया: नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही लगातार मूसलाधार बारिश ने बिहार के सीमांचल और कोसी क्षेत्र में बाढ़ का गंभीर संकट पैदा कर दिया है। कोसी, कनकई और महानंदा नदियां उफान पर हैं। कोसी बराज से पानी का डिस्चार्ज 1 लाख क्यूसेक के करीब पहुँच गया है, जिसके कारण बराज के 11 फाटक खोल दिए गए हैं। जल संसाधन विभाग ने जलप्रवाह 1.5 लाख क्यूसेक तक पहुँचने की चेतावनी जारी की है।
🚧 किशनगंज में पुल धंसने से ठप हुआ संपर्क
किशनगंज जिला बारिश की मार सबसे अधिक झेल रहा है, जहाँ 24 घंटों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई। इसका सबसे बुरा असर ठाकुरगंज-मुरालीगाछ मुख्य मार्ग पर पड़ा, जहाँ मानिकपुर के समीप एक महत्वपूर्ण पुल धंस गया। इस पुल के क्षतिग्रस्त होने से ठाकुरगंज और पश्चिम बंगाल के बीच सीधा संपर्क टूट गया है और सखुआडाली पंचायत समेत दर्जनों गांवों का प्रखंड मुख्यालय से जुड़ाव कट गया है। करीब 50 हजार की आबादी अब वैकल्पिक रास्तों के भरोसे है, जिससे उन्हें 25 किमी की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
📉 किसानों पर दोहरी मार
सड़क और पुल संपर्क टूटने से क्षेत्र के किसान सबसे अधिक प्रभावित हैं। क्षेत्र के मुख्य उत्पाद ‘अनानास और केले’ को पश्चिम बंगाल की मंडियों तक पहुँचाना असंभव हो गया है। परिवहन ठप होने से हजारों टन फसल के खराब होने और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होने का खतरा मंडरा रहा है।
🏗️ 40 लाख का कटावरोधी काम पहली ही बारिश में ध्वस्त
पूर्णिया जिले के बैसा प्रखंड में प्रशासन की लापरवाही भी सामने आई है। यहाँ हरिया गांव में करीब 40 लाख रुपये की लागत से बना कटावरोधी ढांचा पहली ही बाढ़ में बह गया। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग हुआ था। कनकई और महानंदा के कटाव से हरिया, काशीबाड़ी, बरडीहा और हिजली जैसे क्षेत्रों के करीब 100 घरों पर नदी में समाने का खतरा बना हुआ है।
⚠️ प्रशासन का दावा और हकीकत
जिला प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है और क्षतिग्रस्त स्थलों पर मलबा हटाने का काम शुरू किया गया है। हालांकि, स्थानीय ग्रामीण इस कवायद को नाकाफी बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि महज निरीक्षण से बाढ़ को नहीं रोका जा सकता; अब तत्काल स्थायी मरम्मत और मजबूत सुरक्षा ढांचों की आवश्यकता है।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad
