नई दिल्ली: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने सोमवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में देश के मौजूदा हालात पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की। प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि बोर्ड ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में मस्जिदों-मदरसों के डिमोलिशन, मॉब लिंचिंग की घटनाओं और मुस्लिम समुदाय को टारगेट किए जाने पर चिंता जाहिर की है।
📊 ‘वोट बैंक की राजनीति का हो रहा है खेल’
इलियास ने आरोप लगाया कि एक विशेष समुदाय को निशाना बनाकर वोट बैंक को ध्रुवीकृत करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि नफरती भाषणों में सत्ता पक्ष के लोग शामिल हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए बोर्ड ने एक विस्तृत दस्तावेज (Detail Document) तैयार करने का निर्णय लिया है, जिसमें लिंचिंग और डिमोलिशन जैसी घटनाओं का पूरा विवरण होगा। इसके साथ ही, देश में शांति चाहने वाले अन्य समुदायों को साथ लेकर यात्राएं और कन्वेंशन आयोजित किए जाएंगे।
⚖️ UCC और वंदे मातरम पर कानूनी लड़ाई की तैयारी
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि जिन राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की जाएगी, उसे वे हाईकोर्ट और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। वंदे मातरम पर आपत्ति जताते हुए इलियास ने कहा कि उन्हें राष्ट्रगीत के सम्मान में खड़े होने से परहेज नहीं है, लेकिन इसके गायन को अनिवार्य करना संविधान के विरुद्ध है और यह इस्लाम के ‘एकेश्वरवाद’ सिद्धांत के साथ टकराव पैदा करता है। उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट के एक हालिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि इसे अनिवार्य करना गलत है।
🗣️ सेकुलर दलों की भूमिका पर भी उठाए सवाल
कार्यकारिणी की बैठक में इस बात पर भी असंतोष जताया गया कि कथित सेकुलर दल अपनी भूमिका का सही निर्वहन नहीं कर रहे हैं। बोर्ड ने निर्णय लिया है कि वे इन सभी मुद्दों पर जनता के बीच जाएंगे और लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
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