रांची: रिम्स (RIMS) निदेशक डॉ. राजकुमार के इस्तीफे ने झारखंड की राजनीति को गरमा दिया है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। जहां एक ओर बीजेपी ने इसे सरकार की विफलता और अधिकारियों की प्रताड़ना करार दिया है, वहीं झामुमो और कांग्रेस ने इसे निदेशक का व्यक्तिगत निर्णय बताया है।
👿 बीजेपी का हमला: “मंत्री को देना चाहिए था इस्तीफा”
बीजेपी प्रवक्ता रविनाथ किशोर ने आरोप लगाया कि रिम्स निदेशक को बार-बार विभाग और सरकार द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा था, जिसके चलते उन्होंने पद छोड़ना ही बेहतर समझा। बीजेपी ने दावा किया कि सीआईडी जांच केवल एक बहाना है, जबकि असल जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की नाकामी की है, जिसके लिए स्वास्थ्य मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए था।
🤝 झामुमो का पलटवार: “इस्तीफा व्यक्तिगत निर्णय”
सत्तारूढ़ झामुमो (JMM) ने प्रताड़ना के आरोपों को पूरी तरह नकार दिया है। प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि डॉ. राजकुमार को जांच का सामना करना चाहिए था, क्योंकि जांच के बाद ही सच्चाई सामने आती है। झामुमो का मानना है कि इस्तीफा देना उनका अपना निर्णय था, किसी ने उन्हें बाध्य नहीं किया।
🛡️ कांग्रेस का तर्क: “जीरो टॉलरेंस पर काम कर रही सरकार”
कांग्रेस ने राज्य सरकार के बचाव में कहा कि महागठबंधन की सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर चलती है। मीडिया विभाग प्रभारी राकेश सिन्हा ने स्पष्ट किया कि किसी भी गड़बड़ी की शिकायत पर जांच करना कानून सम्मत प्रक्रिया है। उन्होंने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि रिम्स निदेशक को किसी ने मजबूर नहीं किया, वे जांच की प्रक्रिया से आहत होकर नहीं, बल्कि स्वयं अपनी इच्छा से इस्तीफा दिए हैं।
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