डॉ. डी.के. सत्संगी
पूर्व निदेशक – प्रोफेसर एवं
विभागाध्यक्ष, कार्डियो थोरैसिक सर्जरी
जी.बी. पंत अस्पताल एवं संबद्ध
मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज,
दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली।
भारत में हृदय रोग तेजी से बढ़ रहे हैं, फिर भी बड़ी संख्या में लोग इसके शुरुआती चेतावनी संकेतों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। अपने वर्षों के शल्य चिकित्सा अभ्यास और क्लिनिकल रिसर्च के दौरान मैंने बार-बार ऐसे मरीज देखे हैं जो अस्पताल तब पहुंचते हैं जब उनकी स्थिति अत्यंत गंभीर हो चुकी होती है। कई मामलों में समय पर जांच और प्रारंभिक उपचार गंभीर जटिलताओं को रोक सकता था और जीवन भी बचा सकता था।
सबसे बड़ी गलतफहमियों में से एक यह है कि हृदय रोग केवल बुजुर्गों को प्रभावित करता है। वास्तविकता यह है कि गंभीर हृदय संबंधी समस्याएं बच्चों और युवाओं में भी पाई जाती हैं। माता-पिता अक्सर बच्चों में खेलने के दौरान अत्यधिक थकान, सांस फूलना, होंठों या उंगलियों का नीला पड़ना, बार-बार खांसी होना, बेहोशी आना या शारीरिक विकास में कमी जैसे लक्षणों को अनदेखा कर देते हैं। इन संकेतों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि ये जन्मजात हृदय रोग का संकेत हो सकते हैं।
जटिल और दुर्लभ हृदय रोगों पर मेरे शोध और शल्य चिकित्सा अनुभव ने यह दिखाया है कि निदान में देरी कितनी खतरनाक हो सकती है। एक दुर्लभ मामले में एक युवा मरीज के हृदय के भीतर असामान्य ट्यूमर पाया गया, जो प्रारंभ में सामान्य हृदय समस्या जैसा प्रतीत हो रहा था। ऐसे मामले हमें याद दिलाते हैं कि लगातार सांस फूलना, सीने में असुविधा, अनियमित धड़कन, चक्कर आना या बिना कारण कमजोरी महसूस होना जैसे लक्षणों की उचित चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए, न कि स्वयं दवा लेकर उन्हें नजरअंदाज करना चाहिए।
टेट्रालॉजी ऑफ फेलोट जैसी जन्मजात स्थितियों पर किए गए कार्यों ने यह भी सिद्ध किया है कि समय पर की गई सर्जरी किसी बच्चे के जीवन की गुणवत्ता को पूरी तरह बदल सकती है। आज आधुनिक हृदय शल्य चिकित्सा में कई प्रभावी उपचार उपलब्ध हैं, जिनमें कम खर्च वाली पुनर्निर्माण तकनीकें भी शामिल हैं, जो सीमित संसाधनों वाले मरीजों के लिए भी लाभकारी हो सकती हैं। सबसे महत्वपूर्ण है जागरूकता और समय पर कदम उठाना।
ऑपरेशन के बाद की देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। कई मरीज मानते हैं कि सर्जरी के बाद उपचार समाप्त हो जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि स्वस्थ होने की प्रक्रिया काफी हद तक डॉक्टर की सलाह का सही पालन करने पर निर्भर करती है। सर्जरी के बाद बुखार, संक्रमण, सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द या असामान्य कमजोरी जैसे लक्षणों की तुरंत सूचना डॉक्टर को देनी चाहिए। इन चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज करने से ऐसी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं जिन्हें रोका जा सकता था।
जीवनशैली भी हृदय स्वास्थ्य की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नियमित स्वास्थ्य जांच, रक्तचाप और रक्त शर्करा को नियंत्रित रखना, तंबाकू से दूर रहना, तनाव कम करना, नियमित व्यायाम करना और संतुलित आहार लेना सरल लेकिन अत्यंत प्रभावी उपाय हैं। रोकथाम हमेशा आपातकालीन उपचार से बेहतर होती है।
एक हृदय शल्य चिकित्सक और शोधकर्ता के रूप में मेरा दृढ़ विश्वास है कि जागरूकता आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का सबसे शक्तिशाली साधन है। मानव शरीर अक्सर किसी बड़े हृदयाघात या गंभीर समस्या से पहले संकेत देता है। उन संकेतों को समझना और समय पर चिकित्सकीय सहायता लेना जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित हो सकता है।
हृदय रोग से डरना नहीं चाहिए, लेकिन इसे कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर निदान, सही जानकारी और उचित उपचार अनगिनत जीवन बचा सकते हैं।
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