छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (सीजी रेरा) ने उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए एक कड़ा आदेश जारी किया है। यदि किसी खरीदार को प्लॉट खरीदने के बाद भी कब्जा नहीं मिलता है और बिना सूचना बुकिंग रद्द कर दी जाती है, तो अब खरीदारों को भटकना नहीं पड़ेगा। रेरा ने वत्सल्य डेवलपर्स, सेजबहार के मामले में खरीदार की 15 लाख 9 हजार 300 रुपये की मूल जमा राशि के साथ 18 लाख 60 हजार 956 रुपये ब्याज के रूप में यानी कुल 33 लाख 70 हजार 256 रुपये लौटाने का सख्त आदेश दिया है।
🚫 बिना रेरा पंजीयन प्लॉट बेचने पर महागणपति डेवलपर्स पर 8 लाख का जुर्माना
दूसरे मामले में, महागणपति डेवलपर्स की प्लॉटेड ले-आउट परियोजना में बिना रेरा पंजीयन के भूखंडों का विक्रय किया जा रहा था। सीजी रेरा ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए प्रकरण दर्ज किया। जांच में यह कृत्य अधिनियम की धारा 3 का उल्लंघन पाया गया, जिसके बाद डेवलपर पर 8 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। प्राधिकरण ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नियमों के विरुद्ध जाकर प्लॉट बेचना प्रमोटरों को भारी पड़ सकता है।
🛡️ प्लॉट खरीदने से पहले रेरा पंजीयन जरूर जांचें खरीदार
इस पूरी कार्रवाई से स्पष्ट है कि जीवनभर की जमापूंजी लगाकर प्लॉट खरीदने वाले निवेशकों की सुरक्षा सर्वोपरि है। रेरा नियमों के अनुसार किसी भी परियोजना का पंजीयन अनिवार्य है। खरीदारों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी भूखंड की बुकिंग या विज्ञापन देखने से पहले संबंधित परियोजना का रेरा पंजीयन, प्रमोटर का नाम और अन्य कानूनी दस्तावेज अच्छी तरह जांच लें ताकि किसी भी धोखाधड़ी से बचा जा सके।
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