Pradosh Vrat 2026 Significance: भगवान शिव को समर्पित गुरु प्रदोष व्रत पर करें इस कथा का पाठ, मिलेगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

धार्मिक

प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित एक बेहद पवित्र व्रत है, जो हर महीने के दोनों पक्षों (कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष) की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। जिस भी वार को यह तिथि पड़ती है, उसी के अनुसार इसका नामकरण होता है। आज गुरुवार होने के कारण इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जा रहा है। इस व्रत में प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के लगभग 45 मिनट पहले से लेकर सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक का समय पूजा-पाठ के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।

गुरु प्रदोष व्रत पर साधक भगवान शिव के साथ-साथ देवगुरु बृहस्पति की भी उपासना करते हैं। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने के बाद व्रत कथा का पाठ करना बेहद फलदायी माना जाता है।

  • पूजा का शुभ मुहूर्त (प्रदोष काल): शाम 05:59 बजे से रात 08:27 बजे तक (अवधि: 2 घंटे 28 मिनट)

  • त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 7 अक्टूबर 2026 को रात 11:16 बजे से

  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 8 अक्टूबर 2026 को रात 10:15 बजे तक

📜 गुरु प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा (Guru Pradosh Vrat Katha)

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु प्रदोष व्रत की कथा देवराज इंद्र और राक्षस वृत्तासुर के युद्ध तथा राजा चित्ररथ के प्रसंग से जुड़ी हुई है।

एक समय देवराज इंद्र और राक्षस वृत्तासुर की विशाल सेना के बीच भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें देवताओं ने दैत्य सेना को परास्त कर दिया। अपनी इस हार से वृत्तासुर अत्यंत क्रोधित हुआ और उसने एक मायावी तथा विकराल रूप धारण कर लिया। उसकी डरावनी सेना को देखकर सभी देवता भयभीत हो गए और सहायता के लिए देवगुरु बृहस्पति के पास पहुंचे।

🔱 राजा चित्ररथ के श्राप और व्रत के प्रभाव की कथा

देवगुरु बृहस्पति ने देवताओं को समझाया कि वृत्तासुर अपने पूर्वजन्म में राजा चित्ररथ था। राजा चित्ररथ भगवान शिव का परम भक्त था, लेकिन एक बार उसने अहंकार में आकर कैलाश पर्वत पर भगवान शिव और माता पार्वती की सभा का उपहास उड़ाया था। इस भूल पर माता पार्वती ने उसे राक्षस योनि में जन्म लेने का श्राप दिया था, जिसके फलस्वरूप वह वृत्तासुर बना था।

देवगुरु बृहस्पति ने इंद्र और अन्य सभी देवताओं को भगवान शिव की कृपा पाने के लिए गुरु प्रदोष व्रत करने की सलाह दी। देवराज इंद्र ने पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ गुरुवार त्रयोदशी को यह व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से इंद्र ने वृत्तासुर पर विजय प्राप्त की और देवलोक की रक्षा की। धार्मिक मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से गुरु प्रदोष व्रत का पालन करता है, उसके जीवन से शत्रुओं का नाश होता है और घर में सुख-शांति व समृद्धि का वास होता है।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry