नई दिल्ली/चंडीगढ़: पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल ढिल्लों ने आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार पर बेहद तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि पंजाब में नशे का कारोबार लगातार बढ़ रहा है और राज्य की कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा चुकी है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान को अब पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है और उन्हें तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
ढिल्लों ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि ‘कट्टर ईमानदारी’ के बड़े-बड़े दावे करने वाली आम आदमी पार्टी की सरकार पंजाब से नशा खत्म करने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद जनता इन नेताओं को गांवों में घुसने तक नहीं देगी। इस अवसर पर पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह भी विशेष रूप से मौजूद रहे।
👮 “अगर रक्षक ही तस्कर बन जाएंगे, तो पंजाब की जवानी को कौन बचाएगा?”
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा अध्यक्ष ने तरनतारन के खालड़ा सीमावर्ती क्षेत्र में 15 किलोग्राम हेरोइन के साथ एक पुलिसकर्मी के पकड़े जाने की घटना का हवाला देते हुए सरकार के दावों की पोल खोली। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कानून के रखवाले ही खुद नशे के सौदागर बन जाएंगे, तो राज्य की जवानी को बचाना कैसे संभव होगा।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान बड़ी-बड़ी रैलियों में नशा जड़ से खत्म करने के दावे करते नहीं थकते, लेकिन उनके अपने प्रशासन की जमीनी हकीकत यह है कि नशा रोकने की जिम्मेदारी निभाने वाले ही तस्करी में संलिप्त पाए जा रहे हैं। उन्होंने सीमा सुरक्षा बल (BSF) और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि इन केंद्रीय एजेंसियों ने इतनी बड़ी खेप पकड़कर ‘आप’ सरकार के दावों की पोल खोल दी है, अन्यथा यह जहर पंजाब के न जाने कितने हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ देता।
🔍 परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग
केवल ढिल्लों ने मानसा में नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह उर्फ झोटा की हत्या के मामले पर गहरी चिंता जताते हुए इसकी उच्चस्तरीय सीबीआई जांच (CBI Investigation) की पुरजोर मांग की है। उन्होंने कहा कि पंजाब में लगातार बढ़ रही हत्याओं की वारदातों और पुलिस थानों पर हो रहे ग्रेनेड हमलों जैसी घटनाएं आम जनता की सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने राज्य पर बढ़ते कर्ज के बोझ, भ्रष्टाचार के कारण उद्योगों के पलायन, सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) और किसानों की समस्याओं जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर भी राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया।
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