चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा के चल रहे सत्र के दौरान उस समय जोरदार हंगामा हो गया जब ‘आप’ विधायक डॉ. सुखविंदर सिंह सुखी के इस बयान पर विवाद खड़ा हो गया कि जनप्रतिनिधियों के खिलाफ बोलना कांग्रेस के खून में है। इस टिप्पणी पर कांग्रेस विधायकों ने कड़ा विरोध जताया और सदन में हंगामा शुरू हो गया।
कांग्रेस का नाम आते ही पार्टी के विधायक अपनी सीटों से खड़े हो गए और उन्होंने इस बयान को पार्टी का अपमान बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की। कुछ समय के लिए सदन का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया और दोनों पक्षों की ओर से नारेबाजी भी की गई। विधानसभा के अंदर हुई इस तीखी नोकझोंक ने एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते तनाव को उजागर कर दिया है। कांग्रेस नेताओं ने संकेत दिए हैं कि वे इस मुद्दे को सदन के बाहर भी उठा सकते हैं।
प्रताप सिंह बाजवा ने उठाया अवैध माइनिंग का मुद्दा
विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने राज्य में अवैध माइनिंग का गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पंजाब में अवैध माइनिंग सिर्फ छोटे स्तर पर नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर हो रही है और इसमें कुछ मंत्रियों तथा सरकारी अधिकारियों की भूमिका होने के आरोप भी लग रहे हैं। बाजवा ने सदन में कहा कि यह बेहद संवेदनशील मामला है और सरकार को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्होंने मांग की कि सबसे पहले माइनिंग मंत्री सदन में बयान दें कि क्या वास्तव में पंजाब में बड़े स्तर पर अवैध माइनिंग हो रही है। उन्होंने कहा कि अगर कोई अधिकारी या नेता इसमें शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव से पहले अरविंद केजरीवाल ने दावा किया था कि पंजाब में माइनिंग से सरकार को करीब 20 हजार करोड़ रुपये की आय हो सकती है, लेकिन वास्तव में सालाना केवल लगभग 300 करोड़ रुपये ही मिल रहे हैं। बाजवा के मुताबिक यह बड़ा अंतर इस बात की ओर इशारा करता है कि माइनिंग से जुड़े पैसों में कहीं न कहीं बड़ी गड़बड़ी है और काला धन बन रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए और जो भी अधिकारी या राजनीतिक नेता दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही सरकार सदन को यह भी बताए कि इस मुद्दे पर उसका आधिकारिक रुख क्या है और क्या कोई सख्त कदम उठाए जाएंगे।
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