झारखंड में SIR पर सियासी घमासान! JMM ने मांगी तिथि बढ़ाने की मोहलत, BJP का पलटवार: “घुसपैठियों को बैकडोर एंट्री की कोशिश”

झारखण्ड

रांची (झारखंड): झारखंड में मतदाताओं के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की अवधि बढ़ाने को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी और सियासी घमासान शुरू हो गया है।

कांग्रेस पार्टी के बाद अब राज्य की सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने भी किसानों के खेती-किसानी के मौसम और देवघर के सुप्रसिद्ध श्रावणी मेले की व्यस्तता का हवाला देते हुए भारत निर्वाचन आयोग से एसआईआर फॉर्म भरने की अंतिम तिथि आगे बढ़ाने की जोरदार मांग की है।

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने झामुमो और कांग्रेस की इस मांग पर कड़ा एतराज जताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की है। भाजपा ने तिथि बढ़ाने की मांग को पूरी तरह से तर्कहीन और हास्यास्पद बताया है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को बैकडोर से वोटर लिस्ट में शामिल कराने की नीयत से सत्ता पक्ष ऐसी मांग कर रहा है।

🌾 “खेती और श्रावणी मेले में व्यस्त हैं लोग, छूटे वोटर्स तो होगी विडंबना”: JMM प्रवक्ता मनोज पांडे

झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडे ने पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि वर्तमान समय में ग्रामीण इलाकों में किसान और मजदूर खेती-किसानी के काम में पूरी तरह व्यस्त हैं।

इसके अलावा श्रावणी मेले के कारण भी बड़ी संख्या में लोग अपने एन्यूमरेशन (गणना) प्रपत्र भरकर जमा नहीं कर पाए हैं। इसलिए जनहित को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग को डेडलाइन जरूर बढ़ानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि इस व्यस्त समय के कारण राज्य के बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से छूट जाते हैं, तो यह लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ी विडंबना होगी। चुनाव आयोग को इस जमीनी हकीकत पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए।

😡 “घुसपैठियों को बैकडोर एंट्री दिलाने का प्रयास कर रहा सत्ता पक्ष”: BJP प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव

वहीं, झामुमो के दावों का पलटवार करते हुए भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने सत्ताधारी दल पर गंभीर आरोप लगाए।

उन्होंने कहा कि झामुमो-कांग्रेस गठबंधन की सरकार अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को फर्जी तरीके से मतदाता सूची में पिछले दरवाजे (Backdoor) से शामिल कराने का षड्यंत्र रच रही है। अपने राजनीतिक वोट बैंक को साधने और मजबूत करने के उद्देश्य से ही वह चुनाव आयोग पर समय सीमा बढ़ाने का अनुचित दबाव बना रही है। शाहदेव ने कहा कि निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और उसका अपना अधिकार क्षेत्र है कि वह ऐसे बेबुनियाद मामलों पर क्या निर्णय लेती है।

📊 झारखंड में SIR फॉर्म भरने की प्रक्रिया हुई समाप्त, 5 अगस्त को जारी होगी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट

झारखंड में गत 30 जून से शुरू हुई गणना प्रपत्र (Enumeration Form) भरने और जमा करने की तय प्रक्रिया 29 जुलाई यानी अंतिम तिथि तक पूरी हो गई है।

अंतिम दिन तक जमा किए गए सभी इन्यूमरेशन फॉर्म्स का डिजिटाइजेशन कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है और चुनाव आयोग आंकड़ों को अंतिम रूप देने में जुटा है। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 28 जुलाई तक राज्य भर में कुल 2,20,20,994 मतदाताओं ने सही ढंग से भरे हुए और हस्ताक्षरित प्रपत्र जमा किए हैं, जिनका डिजिटाइजेशन पूरा हो चुका है। इन सभी वैध मतदाताओं के नाम 5 अगस्त को प्रकाशित होने वाली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल रहेंगे। हालांकि, इस प्रक्रिया में 43,55,463 मतदाताओं ने अपने गणना प्रपत्र वापस जमा नहीं किए हैं।

🛑 “नहीं बढ़ेगी SIR फॉर्म भरने की डेडलाइन”, मुख्य निर्वाचन अधिकारी के. रवि कुमार का बड़ा बयान

झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) के. रवि कुमार ने तिथि बढ़ाने की तमाम अटकलों और सियासी मांगों पर विराम लगाते हुए स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि एन्यूमरेशन फॉर्म भरने की निर्धारित डेडलाइन को अब और आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी जानकारी दी कि ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद आम जनता के दावों और आपत्तियों (Claims & Objections) के निराकरण के लिए 10 दिनों का अतिरिक्त समय देने का आग्रह भारत निर्वाचन आयोग से किया जाएगा।

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