बिरसा मुंडा जयंती पर मध्य प्रदेश में बनेगा नया इतिहास, सेंट्रल जेल से 32 कैंदियों की होगी रिहाई

मध्य प्रदेश

जबलपुर: मध्य प्रदेश सरकार ने बिरसा मुंडा की जयंती पर जेल प्रावधान में बदल किये हैं. भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर जिलों में बंद कैदियों को भी रिहा किया जाएगा. अभी तक केवल 4 अवसर पर ही जेल से बंद कैदियों को रिहाई दी जाती थी. जबलपुर से इस मौके पर 6 कैदियों को रिहा किया जा रहा है. प्रदेश से 32 कैदियों को बिरसा मुंडा की जयंती पर रिहा किया जाएगा.

प्रदेश से 32 कैदियों को किया जा रहा रिहा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दत्तात्रेय होसबाले ने जबलपुर में आरएसएस के वार्षिक बैठक के दौरान यह बताया था कि “जनजाति स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हमारे भगवान हैं. हमें उन्हें इस तरह का सम्मान देना होगा.” संघ की यह सीख अब सरकार के कामकाज में नजर आने लगी. इसी के चलते अब 15 नवंबर को बिरसा मुंडा जयंती पर हर साल जेलों से कैदी रिहा किए जाएंगे. जबलपुर जेल के जेलर मदन कमलेश ने बताया, “इस साल पहली बार बिरसा मुंडा की जयंती पर केवल जबलपुर जेल से 6 कैदी रिहा किये जा रहे हैं. पूरे प्रदेश में 32 कैदियों को रिहाई दी जा रही है. यह आदेश मध्य प्रदेश सरकार के राज्यपाल के माध्यम से जेलों तक पहुंचा है.”

इस प्रावधान के तहत कैदी होते हैं रिहा

मध्य प्रदेश शासन जेल विभाग मंत्रालय ने दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 432, सहपठित धारा 433 एवं धारा 433 (क) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 473, सहपठित 474 एवं 475) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आजीवन कारावास के बंदियों को नई रिहाई नीति द्वारा 15 नवम्बर (राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस) को शामिल कर 05 अवसरों पर सजा में छूट प्रदान करने का प्रावधान किया गया है.

बिरसा मुंडा जयंती पर रिहा होंगे कैदी

जेल में अच्छे व्यवहार की वजह से आजीवन कारावास के कैदियों को सजा में कमी कर रिहाई की छूट दी जाती थी. यह रिहाई 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस, 26 जनवरी गणतंत्र दिवस, गांधी जयंती 2 अक्टूबर और डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती 14 अप्रैल पर कैदियों की रिहाई की जाती थी. अब बिरसा मुंडा की जयंती पर भी कैदियों की रिहाई की जाएगी. जिन 32 कैदियों को पूरे प्रदेश में रिहा किया जा रहा है. उनमें से 9 आदिवासी कैदी भी शामिल हैं.जिन 5 अवसरों पर कैदी रिहा किए जाते थे. इनमें 2 हमारे राष्ट्रीय पर्व हैं, 3 महापुरुषों की जयंती है. इन महापुरुषों में महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर शामिल थे. हाल ही में भारतीय जनता पार्टी के प्रयास से बिरसा मुंडा को भी शामिल किया गया है.

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