नर्मदापुरम: ओडिशा के पुरी की तर्ज पर नर्मदापुरम के प्राचीन जगदीश मंदिर में भी भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं। ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा का 108 कलशों से दूध, दही और पंचामृत के साथ महास्नान कराया गया। इस भव्य स्नान के साथ ही भगवान अब ‘अनसर काल’ (विश्राम अवधि) में चले गए हैं।
💊 15 दिनों का आयुर्वेदिक उपचार
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महास्नान के बाद भगवान को सर्दी और बुखार हो जाता है। इस दौरान वे अगले 15 दिनों तक अपने शयन कक्ष में विश्राम करेंगे। इस अवधि में मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेंगे। भगवान को इस दौरान पारंपरिक 56 भोग के बजाय जड़ी-बूटियों का काढ़ा, फलों का रस और आयुर्वेदिक औषधियां अर्पित की जाएंगी ताकि वे रथयात्रा से पूर्व पूरी तरह स्वस्थ हो सकें।
🌿 अनसर काल: स्वास्थ्य और परहेज का संदेश
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा से आषाढ़ के बीच का समय मौसम का संधिकाल होता है, जिसमें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं अधिक होती हैं। भगवान भक्तों को इस दौरान स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और परहेज बरतने का संदेश देने के लिए स्वयं बीमार होते हैं। साथ ही, यह काल भगवान जगन्नाथ के भक्त माधवदास के प्रति उनकी अगाध प्रेम और करुणा का भी प्रतीक माना जाता है।
🏹 15 दिन बाद निकलेगी भव्य रथयात्रा
पुजारी ने बताया कि अनसर काल समाप्त होने और भगवान के पूर्ण स्वास्थ्य लाभ के बाद आषाढ़ शुक्ल द्वितीया (16 जुलाई) को भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। रथयात्रा के दौरान भगवान नगर भ्रमण करते हुए अपनी मौसी के घर यानी ‘जनकपुर’ पहुंचेंगे। मंदिर में दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं में भगवान के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए विशेष उत्साह और भक्ति का भाव देखा जा रहा है।
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