Narayanpur News: रावघाट माइंस के खिलाफ ग्रामीणों का हल्लाबोल, ‘गोद ग्राम’ ने शुरू किया अनिश्चितकालीन धरना; जानें क्या हैं मांगें

छत्तीसगढ़

नारायणपुर: रावघाट माइंस को लेकर लोगों में दिनों दिन नाराजगी बढ़ती जा रही है. मंगलवार को तेलसी मोड़ में रावघाट माइंस प्रभावित ग्रामों के ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन की शुरुआत कर दी है. राजाराव बूढ़ादेव गोद ग्राम विकास समिति रावघाट के बैनर तले शुरू हुआ यह आंदोलन अनिश्चितकालीन धरना और हड़ताल में बदल गया है, जिसे परिवहन संघ और श्रमिक संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जबतक उनकी मांगें नहीं मानी जाती तबतक उनका आंदोलन जारी रहेगा.

नारायणपुर रावघाट माइंस के खिलाफ ग्रामीणों में गुस्सा

दरअसल, रावघाट क्षेत्र में संचालित माइंस को लेकर लंबे समय से चले आ रहा असंतोष अब सड़कों पर उतर आया है. प्रभावित गांवों के ग्रामीणों नारायणपुर के ग्राम बिजली मोड़ में धरना देते हुए माइंस से जुड़े कई गंभीर मुद्दों को उठाया. ग्रामीणों का आरोप है कि भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) ने खनन शुरू करने से पहले किए गए वादों को पूरा नहीं किया.

वादाखिलाफी का लगाया आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि तीन साल पहले खदान शुरू होने के दौरान 900 स्थानीय मजदूरों को रोजगार देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक केवल लगभग 180 लोगों को ही काम मिला. इससे स्थानीय युवाओं में भारी नाराजगी है. आंदोलनरत ग्रामीणों ने पर्यावरणीय नुकसान को भी बड़ा मुद्दा बनाया है. उनका कहना है कि माइंस से निकलने वाला “लाल पानी” खेतों और जल स्रोतों में मिल रहा है, जिससे कई किसानों की जमीन बंजर हो चुकी है. ग्रामीणों को आशंका है कि इस दूषित पानी के उपयोग से लोगों में विभिन्न बीमारियां फैल सकती हैं. इसके साथ ही, ग्राम सभाओं की अनुमति और वन अधिकार कानून के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है.

खनन नियमों की अनदेखी का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि खनन कार्य शुरू करने से पहले जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया. मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी BSP पर सवाल उठाए जा रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, बिजली और पेयजल जैसी सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर केवल खानापूर्ति ही नजर आई. इसके अलावा, माइंस में चलने वाले मालवाहक वाहनों के भुगतान और राशि अंतरण में अनियमितताओं को लेकर वाहन मालिक भी परेशान हैं, जिससे उनका आर्थिक संकट और गहरा गया है.

ठोस कार्रवाई की मांग की गई

प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि रावघाट माइंस को लेकर उठी यह आवाज अब एक व्यापक जन आंदोलन का रूप लेती जा रही है. जब तक ग्रामीणों की मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह धरना जारी रहेगा.

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