MP Congress Internal Conflict: दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी के बीच बढ़ी तनातनी; वीर भारत न्यास मामले पर आमने-सामने

मध्य प्रदेश

भोपाल: मध्य प्रदेश कांग्रेस में वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के बीच बढ़ती तनातनी अब खुलकर सामने आ गई है। प्रदेश सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर जीतू पटवारी द्वारा उठाए गए मुद्दों को दिग्विजय सिंह ने सार्वजनिक रूप से ‘तथ्यहीन’ बताकर पार्टी के भीतर बड़ी असहजता पैदा कर दी है।

⚖️ क्या है ‘वीर भारत न्यास’ विवाद?

जीतू पटवारी ने चार दिन पहले दिल्ली में आरोप लगाया था कि उज्जैन में 500 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन एक ट्रस्ट को मात्र एक रुपये में दे दी गई है। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। हालांकि, इसके उलट दिग्विजय सिंह ने उज्जैन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दस्तावेजों के आधार पर इस न्यास को एक शासकीय ट्रस्ट बताया और मुख्यमंत्री को क्लीनचिट दे दी। उन्होंने यहां तक कहा कि “कुछ दलाल पैसे कमाने के लिए झूठे आरोप लगाते हैं।”

🗣️ नेताओं के बयानों से बढ़ीं कांग्रेस की मुश्किलें

दिग्विजय सिंह के इस बयान का फायदा उठाते हुए बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला तेज कर दिया है। विधायक रामेश्वर शर्मा और मंत्री कृष्णा गौर ने इसे कांग्रेस की अंदरूनी फूट बताया है। वहीं, कांग्रेस के पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने जीतू पटवारी के आरोपों का समर्थन करते हुए कहा कि बीजेपी दिग्विजय सिंह के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है और पार्टी अब भी निष्पक्ष जांच की मांग पर कायम है।

📉 लगातार बढ़ती खटास के पीछे की कहानी

दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी के बीच यह कोई पहली दरार नहीं है। हाल के दिनों में कई मौकों पर दोनों नेताओं के बीच मतभेद देखे गए हैं:

  • मीनाक्षी नटराजन के मामले में प्रेस वार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह का बोलना इनकार करना।

  • संगठनात्मक बैठकों में समन्वय की कमी।

  • वेणुगोपाल राव के साथ संबंधों को लेकर दिग्विजय सिंह की हालिया टिप्पणी।

ये घटनाएं स्पष्ट करती हैं कि प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व के सामंजस्य को लेकर गंभीर चुनौतियां हैं, जो आगामी राजनीतिक लड़ाइयों में पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती हैं।

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