भोपाल (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश में केवल कागजों पर संचालित हो रहे फर्जी गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), धार्मिक व सामाजिक ट्रस्टों, शिक्षण समितियों और सोसायटियों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त कदम उठाने की तैयारी पूरी कर ली है।
प्रदेश भर में पंजीकृत लगभग 3.5 लाख गैर-सरकारी और सामाजिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली, नियमित चुनाव प्रक्रिया, सदस्यता विवरण और वित्तीय खर्चों की निगरानी अब पूरी तरह से ऑनलाइन माध्यम से की जाएगी। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य संस्थाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करना और सरकारी अनुदान या जनसहयोग के दुरुपयोग को रोकना है।
💻 रजिस्ट्रार फर्म्स एवं सोसायटीज ने प्रक्रिया की डिजिटल, फर्जी संस्थाओं पर लगेगी रोक
डिजिटल व्यवस्था और निगरानी के प्रमुख बिंदु:
-
डिजिटल वार्षिक रिटर्न: रजिस्ट्रार फर्म्स एवं सोसायटीज ने सभी पंजीकृत संस्थाओं के लिए अपनी वार्षिक प्रगति रिपोर्ट, वित्तीय लेखा-जोखा और ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल पोर्टल से जोड़ दिया है।
-
फर्जी संस्थाओं की पहचान: बिना वैध ऑडिट, बिना कार्यकारिणी चुनाव और कागजों में संचालित फर्जी संस्थाओं की पहचान कर उनके पंजीयन रद्द करने की कार्रवाई तेज की जाएगी।
-
वित्तीय पारदर्शिता: सभी लेन-देन और अनुदान का ब्योरा ऑनलाइन दर्ज होने से आर्थिक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगेगा।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad