Maharashtra Liquor Ban: महाराष्ट्र के इस गांव में शराबबंदी के लिए हुई वोटिंग, जानें महिलाओं ने बाजी मारी या शराब के शौकीनों ने?

महाराष्ट्र

महाराष्ट्र में वाशिम जिले के ब्रह्मा गांव में शराबबंदी के लिए वोटिंग हुई. इस मतदान में महिलाओं ने निर्णायक भूमिका निभाते हुए गांव की तस्वीर बदल दी है. सोमवार को हुए इस ऐतिहासिक मतदान में महिलाओं के भारी समर्थन से गांव में मौजूद वाइन बार का लाइसेंस बंद करने का फैसला लिया गया.

शराबबंदी के सवाल पर हुए मतदान में 523 वोट शराबबंदी के पक्ष में, जबकि केवल 14 वोट शराब बिक्री के समर्थन में पड़े. वहीं 16 वोट अवैध घोषित किए गए. स्पष्ट बहुमत के साथ शराबबंदी के पक्ष में फैसला सामने आने के बाद गांव में खुशी का माहौल देखने को मिला.

जिला परिषद स्कूल में इस वोटिंग के लिए दो सेंटर बनाए गए थे. सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक शांतिपूर्ण तरीके से वोटिंग हुई. चुनाव अधिकारी के रूप में नायब तहसीलदार एच. एस. आडे ने पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी. शासन के नियमों के अनुसार इस मतदान में महिला मतदाताओं के निर्णय को निर्णायक माना गया.

क्या बोले गांववाले?

गांव में रहने वाले एक शख्स ने बताया कि हमारे गांव में पढ़े लिखे लोग हैं. सभी एक साथ रहते हैं. लेकिन यहां खुले एक रेस्टोरेंट में शराब की दुकान खुली है. इसका पूरे गांव ने विरोध किया है. हमने हर तरह से कोशिश की अब कलेक्टर के आदेश से वोटिंग हुई है.

वहीं, दूसरे व्यक्ति ने बताया कि 8 महीने पहले हमारे गांव को अंधेरे में रखकर एक बीयर बार को प्रसाशन ने मंजूरी दी थी. खबर लगते ही हमने आंदोलन किया. 6 महीने से हम आंदोलन कर रहे थे. आज प्रसाशन ने इसके लिए वोटिंग करवाई.

जिलाधिकारी के कहने पर हुई थी वोटिंग

शाम करीब 6 बजे मतगणना शुरू होते ही कुछ ही समय में परिणाम स्पष्ट हो गए और शराबबंदी के पक्ष में प्रचंड बहुमत सामने आया. यह पूरी प्रक्रिया जिलाधिकारी योगेश कुंभेजकर के आदेश पर कराई गई थी.

प्रशासन की सख्त निगरानी और सुनियोजित व्यवस्था के चलते मतदान और मतगणना की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सुचारू रही. परिणाम सामने आते ही गांव की महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला. महिलाओं ने इसे गांव की सामाजिक प्रगति और नशामुक्ति की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया.

अब ग्राम पंचायत ब्रह्मा की सीमा में शराब बिक्री को आधिकारिक रूप से बंद करने की प्रक्रिया जिला प्रशासन द्वारा शुरू की जाएगी. ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस फैसले से गांव में शांति, सुरक्षा और सामाजिक वातावरण में सकारात्मक बदलाव आएगा.

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