गिरिडीह: विश्व प्रसिद्ध मधुबन में प्राकृतिक जल स्रोतों और नालों पर अतिक्रमण का विवाद गहराता जा रहा है। छप्परगढ़ा नाले पर हुए पूर्व के कब्जों के बाद, अब पारसनाथ पहाड़ से जयनगर होकर बहने वाले नाले में पाइपलाइन बिछाए जाने को लेकर स्थानीय लोगों ने मोर्चा खोल दिया है। निवासियों का आरोप है कि नाले की जमीन पर अतिक्रमण की नीयत से यह कार्य किया जा रहा है, जो भविष्य में जल संकट का कारण बन सकता है।
🚧 छप्परगढ़ा नाले से जयनगर नाले तक जारी है सिलसिला
स्थानीय निवासी अमित चंद्रवंशी ने बताया कि मधुबन के नाले लगातार अवैध निर्माण की भेंट चढ़ रहे हैं। छप्परगढ़ा नाले पर पहले इमारत बनी और फिर पुल का निर्माण कर नाले का स्वरूप ही बदल दिया गया। अब जयनगर के पास बहने वाले नाले में नाली की पाइपलाइन बिछाकर उसे दूषित करने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीण इस बात को लेकर बेहद चिंतित हैं क्योंकि इस नाले का पानी न केवल पशुओं के काम आता है, बल्कि इसी नाले में लोग छठ पूजा जैसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान भी करते हैं।
✊ प्रशासन को अल्टीमेटम: अतिक्रमण नहीं रुका तो होगा धरना
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार के ‘जल, जंगल और जमीन’ बचाने के दावों के बावजूद मधुबन में भू-माफिया सक्रिय हैं। पूर्व में भी इस नाले में गंदा पानी बहाने के प्रयास किए गए हैं, जिससे मवेशियों के बीमार होने की घटनाएं सामने आई हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अतिक्रमण की जांच नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे नाले के किनारे अनिश्चितकालीन धरना देने को मजबूर होंगे।
⚖️ प्रशासन का रुख
मामले की गंभीरता को देखते हुए डुमरी के एसडीएम संतोष गुप्ता ने कहा, “मधुबन में अतिक्रमण और नाले में दूषित जल बहाने की शिकायतों की जांच कराई जा रही है। इसके लिए एक टीम का गठन किया जाएगा और यदि कोई दोषी पाया गया, तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
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