नारनौल (हरियाणा): राज्य में करीब 15 दिन पूर्व दस्तक देने वाले संक्रामक ‘लंपी स्किन डिसीज’ (Lumpy Skin Disease) ने विकराल रूप धारण करना शुरू कर दिया है।
प्रदेश में इस घातक वायरस के संक्रमण से पशु की पहली मौत का पुष्ट मामला सामने आया है। नारनौल उपमंडल के निकटवर्ती गांव हुडीना में 15 लीटर दूध देने वाली एक उन्नत नस्ल की दुधारू गाय की लंपी संक्रमण के चलते दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र के पशुपालकों में भय और हड़कंप का माहौल है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पशुपालन एवं डेयरी विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है और प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ बड़े स्तर पर टीकाकरण (Vaccination Drive) शुरू कर दिया गया है।
📊 प्रदेश में 100 से ज्यादा एक्टिव केस: अकेले नारनौल में 97 पशु गंभीर रूप से ग्रस्त
संक्रमण की वर्तमान स्थिति और सीमावर्ती जोखिम:
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पशुपालक की आपबीती: पीड़ित पशुपालक जिले सिंह ने बताया कि उपचार के बावजूद उनकी गाय ने रात के समय दम तोड़ दिया, जबकि उनकी दूसरी गाय भी इस वायरस की चपेट में आकर जिंदगी और मौत से जूझ रही है।
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संक्रमण के आंकड़े: आधिकारिक और स्थानीय स्तर पर प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, राज्यभर में अब तक 100 से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं, जिनमें अकेले नारनौल क्षेत्र के ही 97 पशु लंपी वायरस से पीड़ित हैं।
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राजस्थान सीमा से खतरा: महेंद्रगढ़ जिला भौगोलिक रूप से तीन दिशाओं से राजस्थान की सीमाओं से सटा हुआ है। ऐसे में अंतरराज्यीय सीमाओं से पशुओं की आवाजाही और हाट-बाजारों में खरीद-फरोख्त के कारण संक्रमण की रफ्तार और तेज होने की आशंका बनी हुई है।
⚠️ भिवानी के बहल सहित कई गांवों में दस्तक: तेज बुखार और त्वचा पर बन रहीं गांठें
लक्षण और प्रसार का दायरा:
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नए क्षेत्रों में फैलाव: नारनौल के साथ-साथ भिवानी जिले के बहल कस्बे और आसपास के देहाती इलाकों में भी लंपी संक्रमण के नए रोगी पशु सामने आ रहे हैं।
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घातक लक्षण: पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विकास के अनुसार, इस रोग से पीड़ित पशुओं को शुरुआत में तेज बुखार आता है, जिसके बाद शरीर की त्वचा पर बड़ी-बड़ी गांठें (Nodules) उभर आती हैं जो आगे चलकर गहरे घावों में बदल जाती हैं। पशुओं में सुस्ती और दूध उत्पादन में अचानक भारी गिरावट देखने को मिलती है।
💉 पशुपालन विभाग की सख्त एडवाइजरी: संक्रमित पशुओं को तुरंत अलग रखने की अपील
बचाव के प्रमुख उपाय और दिशा-निर्देश:
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आइसोलेशन अनिवार्य: विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जिस भी पशु में लंपी के लक्षण दिखाई दें, उसे स्वस्थ मवेशियों से तुरंत दूर अलग बाड़े में बांधा जाए।
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मक्खी-मच्छरों पर नियंत्रण: यह वायरस मक्खियों, मच्छरों और जूं जैसे कीटों के जरिए तेजी से फैलता है, इसलिए पशु बाड़ों में नियमित कीटनाशक छिड़काव, स्वच्छता और धुएं की व्यवस्था की जाए।
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सीमावर्ती क्षेत्रों में चौकसी: राजस्थान से सटे रास्तों पर पशुओं के अवैध परिवहन को रोकने के लिए नाकेबंदी और जांच बढ़ा दी गई है।
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त्वरित उपचार: पशुपालकों को ताकीद की गई है कि किसी भी प्रकार की घरेलू लापरवाही न बरतें और लक्षण दिखते ही तत्काल नजदीकी राजकीय पशु चिकित्सालय से संपर्क कर उपचार व टीकाकरण कराएं।
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