उत्तर प्रदेश में शराब से होने वाली आय में बीते चार सालों में 40% की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, और इसका श्रेय जाता है राज्य सरकार की नई ऑनलाइन शराब लॉटरी व्यवस्था को. इस व्यवस्था के तहत 27,308 शराब दुकानों के लाइसेंस के लिए 4 लाख से अधिक आवेदनों की बाढ़ आ गई. साथ ही, कंपोजिट दुकानों की शुरुआत ने राजस्व बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई, जहां बीयर और स्कॉच जैसी सभी कैटेगरी एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं.
लॉटरी सिस्टम ने कराई बंपर कमाई
राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में शराब से मिलने वाला राजस्व ₹51,000 करोड़ तक पहुंच गया, जबकि 2018-19 में यह ₹23,927 करोड़ था. यह लगभग दोगुनी बढ़ोतरी है. इसका कारण है नई आबकारी नीति, जिसे 2024 में लागू किया गया था.
नई दुकानें, नया सिस्टम
लॉटरी के तहत देशी शराब, कंपोजिट दुकानें, भांग की दुकानें और मॉडल दुकानें (जहां बैठने की व्यवस्था भी होती है) आवंटित की गईं. मार्च-अप्रैल 2024 के दौरान हुई इस लॉटरी में 4,18,111 आवेदन आए.
इनमें सबसे अधिक रुचि कंपोजिट दुकानों में देखी गई, जिनमें बीयर और IMFL दोनों मिलती हैं. जैसे ग्रेटर नोएडा की एक दुकान के लिए 265 लोगों ने आवेदन किया.
सरकार को केवल प्रोसेसिंग फीस के जरिए ₹2,000 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व मिला.
- देशी शराब दुकान: ₹40,000
- कंपोजिट दुकान: ₹55,000
- भांग की दुकान: ₹25,000
- मॉडल दुकान: ₹60,000
बिहार से भी बढ़ी बिक्री
बिहार में शराबबंदी के चलते कुशीनगर, देवरिया, गाजीपुर, बलिया, चंदौली और सोनभद्र जैसे यूपी के सीमावर्ती जिलों में शराब की बिक्री में तीन गुना तक उछाल आया है. लोग नाव, ट्रेन और बस से यूपी आकर शराब खरीदते हैं. सरकार की स्मार्ट नीतियों और डिजिटल लॉटरी सिस्टम की बदौलत उत्तर प्रदेश न केवल शराब बिक्री में सबसे आगे है, बल्कि इससे राज्य की आय में भी बड़ा इजाफा हुआ है. शराब अब केवल एक व्यापार नहीं, सरकार के खजाने को भरने वाला सबसे प्रभावी ज़रिया बन चुका है.
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