भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जब अपनी मौद्रिक नीति या यूं कहें कि रेपो रेट की दरें तय करता है, तो उसके लिए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के कैलकुलेशन को बेस बनाता है. भारत में रिटेल महंगाई नापने के लिए सीपीआई का इस्तेमाल होता है. अब सरकार ने इसी सीपीआई में ब्लिंकइट, जेप्टो और बिगबास्केट जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मौजूद सामान की कीमतों को शामिल करने का प्लान बनाया है.
मौजूदा समय में सीपीआई के तहत ग्रॉसरी से लेकर टेलीफोन के बिल, पेट्रोल-गैस की कीमत इत्यादि को मिलाकर एक प्रोडक्ट बास्केट तैयार की जाती है और फिर अलग-अलग मार्केट में उस बास्केट की कॉस्ट के आधार पर इंडेक्स बनाकर महंगाई का कैलकुलेशन होता है. लेकिन देश में कंज्यूमर के खरीदारी के बदलते पैटर्न को देखते हुए सरकार ने सीपीआई में बदलाव की योजना बनाई है.
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