सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल है खरगडीहा का लंगेश्वरी बाबा समाधि स्थल, लाखों की संख्या में जुटें श्रद्धालु

झारखण्ड

गिरिडीह: खरगडीहा में अवस्थित लंगटा बाबा समाधि स्थल (लंगेश्वरी बाबा) पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी है. पौष पूर्णिमा पर यहां लगे मेला में विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु पहुंचे हैं. लोग बाबा के समाधि स्थल पर सुबह से ही चादर चढ़ा रहे हैं. वैसे परंपरा के अनुसार सुबह 3 बजे पहली चादर जमुआ थाना के थानेदार विभूति देव ने चढ़ाई. इसके बाद भक्तों द्वारा चादर चढ़ाने का सिलसिला शुरू कर दिया. यहां विधि व्यवस्था को लेकर उपस्थित जमुआ के सर्कल इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार दास एवं थाना तथा प्रखंड के कई पदाधिकारियों ने भी बाबा के समाधि पर चादर चढ़ाकर क्षेत्र में अमन चैन की मन्नत मांगी.

सुबह से ही श्रद्धालुओं की उमड़ रही भीड़

शनिवार की सुबह से यहां भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी है. यहां झारखंड के विभिन्न जिलों के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, ओड़िशा, उत्तर प्रदेश के अलावा कई प्रदेश से लोग पहुंचे हैं. कई ऐसे लोग भी पहुंचे हैं जो विदेश में रहते हैं. विभिन्न धर्म के लोग भी बाबा के दरबार में पहुंचे, जो चादर चढ़ाकर मन्नत मांगेंगे. इधर, भीड़ को देखते हुए खोरी महुआ के एसडीएम की अगुवाई में सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किया गया है.

क्या है लंगेश्वरी बाबा की मान्यता

बता दें कि लंगेश्वरी बाबा के प्रति लोगों की गहरी आस्था है. लोग बताते हैं कि ब्रिटिश काल में साधू-संत के साथ देवघर जा रहे लंगेश्वरी बाबा खरगडीहा स्थित थाना में रुके थे. उस वक्त के थाना प्रभारी ने बाबा को जाने को कहा इसपर बाबा ने कहा कि तू ही चला जाएगा बाबा के इस कथन के बाद खरगडीहा में अवस्थित थाना वहां से हटकर से जमुआ आ गया था.

इंसान के साथ पशु-पक्षी से भी प्रेम करने वाले बाबा वर्ष 1910 में पौष पूर्णिमा के दिन ब्रह्मलीन हो गए थे और यहां पर बाबा की समाधि बनायी गई. कहा जाता है कि इनके पास आने वाले लोगों का दुख भी दूर हो जाता था. यही कारण है कि विभिन्न धर्म के लोगों की आस्था इनके प्रति है.

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry