खान-खनिज संशोधन बिल के खिलाफ रांची में राजद-वाम दलों का साझा मोर्चा: आर्थिक नाकेबंदी और दिल्ली घेराव की चेतावनी

झारखण्ड

रांची (झारखंड): केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक (MMDR Amendment Bill) को संसद से पारित कराए जाने के विरोध में राजधानी रांची में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और वाम दलों (Left Parties) ने संयुक्त बैठक कर निर्णायक आंदोलन की रणनीति तैयार की।

हालांकि, इस महत्वपूर्ण बैठक में ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के राज्य में दो बड़े घटक दल—झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस का कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। इस पर राजद नेताओं ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि दोनों सहयोगी दलों के न पहुंचने का कोई राजनीतिक या नकारात्मक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए और आगामी 22 अगस्त के संयुक्त कार्यक्रम में गठबंधन की पूरी एकजुटता धरातल पर दिखाई देगी।

⚔️ सेस लगाने का अधिकार छीनने से रुकेगा विकास, दिल्ली में भी देंगे धरना: अनीता यादव

बैठक के उपरांत आयोजित साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राजद की प्रदेश उपाध्यक्ष अनीता यादव ने केंद्र सरकार पर राज्य के अधिकारों पर कुठाराघात करने का गंभीर आरोप लगाया।

अनीता यादव ने कहा कि माइंस एवं मिनरल्स पर राज्य सरकार के सेस लगाने के संवैधानिक अधिकार को समाप्त कर झारखंड की आर्थिकी को पंगु बनाने की साजिश की गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संसद से पारित इस संशोधन विधेयक को वापस नहीं लिया गया, तो पार्टी सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेगी, आर्थिक नाकेबंदी की जाएगी और दिल्ली में भी विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कानून से राजस्व का भारी नुकसान होगा, जिसका सीधा प्रभाव स्वास्थ्य, सड़क निर्माण और ‘मंईयां सम्मान योजना’ जैसी लोक-कल्याणकारी योजनाओं पर पड़ेगा।

🏛️ संघीय ढांचे और संविधान पर सीधा हमला, राष्ट्रपति से करेंगे हस्तक्षेप की अपील: शुवेन्दु सेन

संवाददाता सम्मेलन में सीपीआई (माले) के वरिष्ठ नेता शुवेन्दु सेन ने केंद्र की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कानून पूरे देश के नाम पर लाया गया है, परंतु इसका मुख्य निशाना झारखंड जैसे संसाधन-संपन्न राज्य को बनाना है।

उन्होंने कहा कि राज्यों को विश्वास में लिए बिना यह निर्णय लेना भारत के संघीय ढांचे (Federal Structure) और संविधान की मूल भावना पर सीधा आघात है। उन्होंने कहा कि इसमें कोई समझौता नहीं होगा और केंद्र को यह बिल पूरी तरह वापस लेना होगा। इसके साथ ही एक प्रतिनिधिमंडल महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर इस कानून के घातक परिणामों से अवगत कराएगा और जनहित में हस्तक्षेप की मांग करेगा।

📢 22 अगस्त को राजभवन मार्च और राज्यपाल को ज्ञापन, भाजपा सांसदों पर चुप्पी का आरोप

सीपीआई के राज्य कार्यसमिति सदस्य अजय सिंह ने झारखंड से चुने गए भारतीय जनता पार्टी के सांसदों की चुप्पी पर कड़ा ऐतराज जताया।

अजय सिंह ने कहा कि स्थानीय भाजपा सांसदों को संसद में राज्य के हितों की रक्षा के लिए इस बिल का मुखर विरोध करना चाहिए था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ‘समता जजमेंट’ को अक्षरशः लागू करने की मांग की। उन्होंने स्मरण कराया कि झारखंड उलगुलान और जनक्रांति की ऐतिहासिक धरती है, जहां के लोग अपने जल, जंगल और जमीन के अधिकारों से समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने ऐलान किया कि 22 अगस्त को इंडिया गठबंधन के सभी दल संयुक्त बैठक कर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपेंगे।

👥 साझा बैठक व संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित प्रमुख नेता

राजद और वाम दलों के इस संयुक्त मंथन व प्रेस वार्ता में दोनों पक्षों के कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे:

  • अनीता यादव: प्रदेश उपाध्यक्ष, राजद

  • रंजन यादव: प्रदेश युवा अध्यक्ष, राजद

  • रामकुमार यादव: प्रदेश सचिव, राजद

  • मनोज पांडेय: प्रदेश महासचिव, राजद

  • क्षितिज मिश्रा व मंतोष यादव: युवा राजद पदाधिकारी

  • शुवेन्दु सेन एवं अनंत प्रसाद गुप्ता: वरिष्ठ नेता, सीपीआई (माले)

  • अजय सिंह एवं किरण कुमारी: राज्य कार्यसमिति सदस्य व नेत्री, सीपीआई

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