झारखंड सूचना आयोग अब फिर से सक्रिय हो गया है। हाल ही में नियुक्त चार सूचना आयुक्तों—अनुज सिन्हा, शिवपूजन पाठक, तनुज खत्री और अमूल नीरज खलखो—ने लोकभवन में शपथ लेने के उपरांत अपना पदभार ग्रहण कर लिया है। हालांकि, मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्ति न होने के कारण फिलहाल सुनवाई शुरू होने के लिए प्रभारी आयुक्त का इंतजार है। संयुक्त सचिव सुदेश कुमार वर्मा ने बताया कि जल्द ही किसी एक आयुक्त को प्रभारी मुख्य सूचना आयुक्त का दायित्व सौंपा जाएगा, जिसके बाद ही प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां बहाल होंगी।
🕒 23 हजार से अधिक मामले लंबित
आयोग के समक्ष पिछले कई वर्षों से मामलों का अंबार लगा है। 8 मई 2020 के बाद से सूचना आयुक्तों की अनुपलब्धता के कारण करीब 23,000 अपील मामले और 400 शिकायतें लंबित हैं। इनमें से कई अपीलें 10 साल से भी अधिक पुरानी हैं। नवनियुक्त आयुक्तों ने इन लंबित फाइलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने का संकल्प लिया है।
💻 बदलेगा काम करने का तरीका: ऑनलाइन सुनवाई पर जोर
नवनियुक्त आयुक्त अनुज सिन्हा ने बताया कि लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण के साथ ही ‘ऑनलाइन सुनवाई’ शुरू की जाएगी, ताकि राज्य के सुदूर क्षेत्रों से आने वाले नागरिकों और अधिकारियों को भागदौड़ न करनी पड़े। वहीं तनुज खत्री का मानना है कि यदि विभागों द्वारा वेबसाइटों और डिजिटल माध्यमों पर स्वतः सूचनाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो आरटीआई के तहत आने वाली अपीलों की संख्या में स्वतः कमी आएगी।
🎯 पारदर्शिता और जवाबदेही है प्राथमिकता
शिवपूजन पाठक और अमूल नीरज खलखो ने आरटीआई कानून के मूल उद्देश्यों को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर दिया। आयुक्तों का कहना है कि उनकी मुख्य जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि नागरिकों को आरटीआई के तहत सूचनाएं समय पर और सुगमता से प्राप्त हों। राज्य के लोगों को अब उम्मीद है कि आयोग के गुलजार होने के बाद सूचना के अधिकार की व्यवस्था फिर से पटरी पर आएगी और प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ेगी।
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