इस बार मानसून के दौरान आई भयंकर बाढ़ ने छत्तीसगढ़ के कई जिलों में भारी तबाही मचाई है, जिसमें बस्तर संभाग को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। किसानों की खड़ी फसलें खेतों में डूब गईं और घर-दुकानें पानी में समा गईं। लगातार बांधों से छोड़े गए पानी के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का संकट कई दिनों तक बना रहा। इससे अन्नदाताओं की आर्थिक कमर पूरी तरह टूट चुकी है और घरों में रखा अनाज भी सड़ गया है। अब सरकार से मदद और मुआवजे की मांग को लेकर बाढ़ पीड़ित किसान सड़कों पर उतर आए हैं।
🚜 सड़कों पर उतरे किसान, 10 दिनों के भीतर आर्थिक मदद न मिलने पर शहर में चक्काजाम की चेतावनी
गुरुवार को बस्तर जिला मुख्यालय में किसान कांग्रेस के बैनਰ तले सैकड़ों किसानों ने अपने परिवारों के साथ बस्तर कलेक्ट्रेट का जोरदार घेराव किया और जमकर नारेबाजी की। किसानों की मांग है कि प्रशासन जल्द से जल्द नुकसान का सर्वे करवाकर उन्हें आर्थिक मदद प्रदान करे। प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि आगामी 10 दिनों के भीतर प्रभावितों को उचित मुआवजा नहीं दिया गया, तो वे जगदलपुर शहर में ट्रैक्टरों के साथ उतरकर चक्काजाम करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
📢 किसान कांग्रेस की मांग: केसीसी लोन माफी और कच्चे-पक्के मकानों के लिए भारी मुआवजे का ऐलान हो
इस दौरान किसान कांग्रेस नेताओं ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन किसानों के साथ केवल खानापूर्ति कर रहा है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुशील मौर्य और दयाराम कश्यप ने मांग रखी कि बाढ़ प्रभावित किसानों को प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए, खेती के लिए लिए गए सभी केसीसी (KCC) लोन माफ किए जाएं, कच्चे मकान के लिए 3 लाख, पक्के मकान के लिए 5 लाख और आंशिक क्षति पर 1 लाख रुपये की सहायता दी जाए। साथ ही बाढ़ में मवेशी गंवाने वाले पशुपालकों को भी उचित मुआवजा देने की मांग उठाई गई।
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