International Yoga Day in Uttarakhand: सीएम धामी ने बनबसा में किया योग; उत्तराखंड को ‘योग एवं वेलनेस की वैश्विक राजधानी’ बनाने का संकल्प

उत्तराखण्ड

बनबसा (चम्पावत): 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बनबसा में राज्य स्तरीय कार्यक्रम में भाग लिया। इस भव्य कार्यक्रम में सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवानों, युवाओं, छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों के साथ मुख्यमंत्री ने सामूहिक योगाभ्यास किया। सीएम धामी ने योग को स्वस्थ और संतुलित जीवन का आधार बताते हुए प्रदेशवासियों को बधाई दी।

🌿 योग: मन, शरीर और आत्मा का सामंजस्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति है। उन्होंने कहा, “तनाव और अस्वस्थ जीवनशैली के इस दौर में योग एक प्रभावी प्राकृतिक उपचार है। यह न केवल शारीरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, बल्कि मानसिक एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का भी संचार करता है।” उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से ही आज विश्व के 190 से अधिक देशों में करोड़ों लोग योग से जुड़ चुके हैं।

🏔️ उत्तराखंड: योग और वेलनेस की वैश्विक राजधानी

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार उत्तराखंड को योग और वेलनेस के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है:

  • नई योग नीति: देश की पहली योग नीति लागू की गई है।

  • अनुदान एवं सब्सिडी: योग केंद्रों के लिए 20 लाख रुपये तक की सब्सिडी और शोध कार्यों के लिए 10 लाख रुपये तक का अनुदान।

  • योग हब: प्रदेश में पांच नए ‘योग हब’ विकसित किए जा रहे हैं और आयुष हेल्थ एवं वेलनेस सेंटरों को सशक्त बनाया जा रहा है।

🛣️ शारदा कॉरिडोर से बढ़ेगा आध्यात्मिक पर्यटन

सीएम धामी ने कहा कि बनबसा में कार्यक्रम आयोजित करने का उद्देश्य शारदा नदी तट पर आध्यात्मिक साधना को बढ़ावा देना है। उन्होंने शारदा कॉरिडोर परियोजना का जिक्र करते हुए बताया कि लगभग 3,300 करोड़ रुपये की लागत से टनकपुर से बनबसा तक रिवर फ्रंट और धार्मिक पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है। प्रथम चरण में 179 करोड़ रुपये की लागत से शारदा घाट के पुनर्विकास का कार्य शुरू हो चुका है।

🎯 युवाओं से विशेष आह्वान

मुख्यमंत्री ने युवाओं को नशे जैसी बुराइयों से दूर रहने और अनुशासित जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि योग को केवल एक दिन तक सीमित न रखकर इसे दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

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