‘वंदे मातरम’ का अपमान अब अपराध! राज्यसभा में बिल पास; कांग्रेस के वॉकआउट पर नित्यानंद राय का तीखा हमला

दिल्ली

नई दिल्ली: लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पास होने के बाद, अब ‘वंदे मातरम’ का अपमान करने को कानूनी रूप से आपराधिक अपराध बनाने वाला महत्वपूर्ण बिल राज्यसभा में भी सर्वसम्मति से (ध्वनि मत द्वारा) पास हो गया है।

हालांकि, इस ऐतिहासिक विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के नेतृत्व में समूचे विपक्ष ने सदन में जमकर हंगामा किया और अंततः सदन से वॉकआउट कर दिया। इसके बावजूद ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ (Prevention of Insults to National Honour Amendment Bill, 2026) को ऊपरी सदन की मंजूरी मिल गई। बिल पर हुई बहस का विस्तार से जवाब देते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि कांग्रेस तुष्टीकरण की पुरानी राजनीति का सहारा लेकर देश के आन-बान-शान और राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का अपमान करने की कोशिश कर रही है।

📜 “वंदे मातरम भारत की आत्मा और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक”: कांग्रेस के विरोध पर गृह राज्य मंत्री ने जताई हैरानी

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने विपक्ष के रवैये पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ का विरोध करने का सीधा अर्थ भारत के ‘तेरे टुकड़े होंगे गैंग’ जैसी ताकतों का हौसला बढ़ाना है।

उन्होंने कहा कि कई माननीय सदस्यों ने सकारात्मक राय रखी, लेकिन उन्हें इस बात पर बेहद हैरानी है कि कांग्रेस जैसी पुरानी पार्टी इसका विरोध क्यों कर रही है। नित्यानंद राय ने जोर देकर कहा, “‘वंदे मातरम बिल’ कोई आम कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मा, हमारी राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक विरासत का अमर प्रतीक है, जो हमें स्वतंत्रता संग्राम के महान बलिदानों की याद दिलाता है।” उन्होंने याद दिलाया कि बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में जब राष्ट्रगीत की रचना की थी, तब उन्होंने कहा था कि एक दिन यह हर भारतीय की ज़ुबान पर एक पवित्र मंत्र की तरह गुंजेगा। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि 1937 में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने ‘वंदे मातरम’ को केवल दो छंदों तक ही सीमित कर दिया था।

🇮🇳 ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प के लिए वंदे मातरम जरूरी, देश की जनता सिखाएगी सबक

सदन को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह समझ से परे है कि राष्ट्रगीत का सम्मान बढ़ाने वाले बिल से कुछ लोगों को आपत्ति क्यों है।

उन्होंने कहा, “इस बिल के माध्यम से राष्ट्रगीत का अनादर करने वालों के खिलाफ दंडात्मक सजा का स्पष्ट प्रावधान किया गया है। वंदे मातरम का विरोध साबित करता है कि कांग्रेस हमेशा वोट बैंक और तुष्टीकरण की नीति अपनाकर देश के सम्मान को ठेस पहुँचाती रही है।” उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि देश का युवा और आम जनता सब कुछ देख रही है और वक्त आने पर इसका माकूल जवाब देगी। ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की राष्ट्रीय अवधारणा को साकार करने के लिए वंदे मातरम का सम्मान परम आवश्यक है।

🪔 “स्वामी विवेकानंद के सपने को पूरा कर रहे हैं पीएम मोदी”, राजनीति से ऊपर होना चाहिए राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए गृह राज्य मंत्री ने स्वामी विवेकानंद के संस्मरणों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, “स्वामी विवेकानंद को बचपन में ‘नरेंद्र’ कहा जाता था। उन्होंने अपने जीवनकाल में भारतवर्ष में ‘वंदे मातरम’ को वह गौरवमयी स्थान दिलाने का महान सपना देखा था, जिसे आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में पूरा किया जा रहा है।” उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रगीत के सम्मान जैसे अति-संवेदनशील और पवित्र विषयों को संकीर्ण राजनीति से पूरी तरह ऊपर रखा जाना चाहिए।

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