जमशेदपुर: टाटा स्टील के एमडी टीवी नरेंद्रन ने केक काटकर शहरवासियों को नए साल की बधाई दी. मीडिया से बातचीत के दौरान टाटा स्टील के एमडी ने बताया कि जमशेदपुर स्टील कंपनी में कोयला की खपत कम हो, इसके लिए नई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके अलावा अन्य कई नई तकनीक का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव पारित है. चीन सरकार की नीति और उनके सहयोग के कारण चीन उत्पादित स्टील का कारोबार कम प्रॉफिट में भी चल रहा जो भारत ही नहीं विश्व बाजार के लिए चुनौती है.
जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित सेंटर फॉर एक्सीलेंस परिसर में टाटा स्टील के सीईओ सह एमडी टीवी नरेंद्रन ने केक काटकर शहर वासियों को नए साल की बधाई दी है. इस दौरान टाटा स्टील के वीपीसीएस डी. बी. सुदररामम, डॉ. टीजी मुखर्जी के अलावा कई वरीय अधिकारी और चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष, कई प्रबुद्ध नागरिक मौजूद रहे.
भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही हैः एमडी टीवी नरेंद्रन
शहर वासियों को बधाई देने के बाद टाटा स्टील के एमडी ने मीडिया से बातचीत की. इस दौरान उन्होंने बताया कि विश्व बाजार में कई चुनौतियां हैं. इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था और बाजार तेजी से मजबूत हो रहा है. स्टील प्रोडक्शन सेक्टर में चीनी सरकार की नीतियों और सपोर्ट की वजह से चीनी स्टील मार्केट कम मुनाफे के बावजूद काम करता रहा है, जो ग्लोबल मार्केट के लिए एक चुनौती है.
AI के क्षेत्र में भी कंपनी काम कर रही हैः एमडी टीवी नरेंद्रन
टाटा स्टील वर्तमान विश्व बाजार को देखते हुए हर चुनौतियों का सामना करने के लिए दृढ़ संकल्पित है. 100 साल से ज्यादा पुरानी टाटा स्टील कंपनी ने पिछले 10 सालों से डिजिटल के क्षेत्र में काफी इन्वेस्ट किया है. कंपनी AI के क्षेत्र में काम कर रही है. 500 से ज्यादा एआई मॉडल का इस्तेमाल किया जा रहा है.
चीन का लाभ 5 सालों में 5% से ज्यादा नहीं रहा लेकिन वहां की सरकार की मदद और रुल के कारण वहां की इंडस्ट्री फायदेमंद है. भारत में स्टील की डिमांड ज्यादा है लेकिन स्टील की कोई भी नई इंडस्ट्री नहीं आई है. उन्होंने बताया कि टाटा के बोर्ड मीटिंग में कई अहम फैसले लिए गए हैं, इसके तहत टाटा स्टील प्लांट के ब्लास्ट फरनेस के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है. उन्होंने बताया कि इसमें कोयला का इस्तेमाल कम होगा.
यूरोपियन ऑपरेशन पर असर पड़ा है
उन्होंने बताया कि मजबूत डिमांड और सप्लाई के बावजूद 2025 में भारत में स्टील की कीमतें पिछले पांच सालों में सबसे कम रहीं. पिछला साल कई वजहों से चुनौतीपूर्ण रहा, जिसमें दुनिया भर में उठाए गए कदमों की वजह से ग्लोबल ट्रेड के मुद्दे और भी मुश्किल होते गए. उन्होंने बताया कि टाटा स्टील समेत घरेलू स्टील सेक्टर पर असर नहीं पड़ा है, लेकिन यूरोप और अमेरिका से स्टील पर निर्यात शुल्क लगने की वजह से टाटा स्टील के यूरोपियन ऑपरेशन पर असर पड़ा है.
उन्होंने कहा कि चीन 100 मिलियन टन से ज्यादा स्टील एक्सपोर्ट कर रहा है, जो लगभग भारत के कुल स्टील प्रोडक्शन के बराबर है. एमडी टीवी नरेंद्रन ने कहा हालांकि चीन से भारत में ज्यादा स्टील नहीं आ रहा है, लेकिन उसने ऐसी स्थिति पैदा कर दी है कि खराब अंतर्राष्ट्रीय बाजार की वजह से हम ज्यादा प्रोडक्शन के बावजूद एक्सपोर्ट नहीं कर पा रहे हैं.
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