धनबाद में कमाल! मल से सोना उपजाएंगे किसान, ऑर्गेनिक खाद बनाने वाला नया प्लांट तैयार; बेहद कम दाम में मिलेगी उम्दा उर्वरक

झारखण्ड

धनबाद: मल से उर्वरक खाद बनाने का कारखाना यानी FSTP प्लांट चिरकुंडा में बनकर तैयार हो चुका है. खाद का उत्पादन भी शुरू हो गया है और जल्द ही यह बाजारों में उपलब्ध होगी. चिरकुंडा नगर परिषद ने इस प्रोडक्ट को लोगों के बीच बढ़ावा देने के लिए स्वयं सहायत समूह की महिलाओं को लगाया है. जैसा कि नाम से पता चलता है, यह खाद शौचालयों से निकलने वाले अपशिष्ट से बनाई जाती है.

यह पूरी तरह से ऑर्गेनिक है. इसके उत्पादन में किसी भी केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता. जहां रासायनिक खाद मिट्टी की उर्वरता कम करती है, वहीं यह मल से निर्मित खाद इसे बढ़ाती है. चिरकुंडा नगर परिषद ने सुंदर नगर में 3 करोड़ रुपये की लागत से इस प्लांट का निर्माण कराया है. प्लांट की प्रोसेसिंग की देखरेख जुडको (JUDCO) कंपनी ने की.

चिरकुंडा नगर परिषद के प्रबंधक मुकेश रंजन ने बताया कि शहर के सभी शौचालयों के सेप्टिक टैंकों से अपशिष्ट प्लांट में लाया जाता है. यह 12 MLD (मिलियन लीटर प्रति दिन) क्षमता वाला प्लांट है. इस प्रक्रिया के लिए कुल 12 चैंबर बनाए गए हैं, और उनमें से छह में उत्पादन शुरू हो गया है. जिसकी सप्लाई की तैयारियां चल रही हैं. हर चैंबर के लिए 50 ट्रक अपशिष्ट की जरूरत होती है. एक चैंबर में खाद तैयार होने में लगभग छह महीने लगते हैं.

अपशिष्ट में मौजूद पानी के लिए भी एक अलग व्यवस्था की गई है. इस पानी को नीचे से निकालकर फिल्टर करके एक जगह इकट्ठा किया जाता है. फिर इस पानी का इस्तेमाल सिंचाई के लिए किया जाता है. फिलहाल, उन्हें जितने अपशिष्ट की जरूरत है, उतना अपशिष्ट नहीं मिल पा रहा है.

उन्होंने कहा कि वे इसे सोना खाद कहते हैं. किसान इसका इस्तेमाल अपने खेतों की उर्वरता बढ़ाने के लिए कर सकते हैं. दूसरी रासायनिक खादों के उलट, यह मिट्टी को नुकसान नहीं पहुंचाती क्योंकि यह पूरी तरह से ऑर्गेनिक है.

नियमानुसार, सेप्टिक टैंकों की हर तीन साल में सफाई करानी होती है. इसके लिए एक जन जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है. स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को इसके प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी दी गई है. वे जागरूकता फैलाने के लिए घर-घर जा रही हैं. अपशिष्ट को प्लांट तक ले जाने के लिए गाड़ियां दी गई हैं. एक राशि देने के बाद, गाड़ी घरों तक सर्विस देती है.

स्वयं सहायता समूह से जुड़ी एक महिला संयुक्ता देवी ने बताया कि वे घर-घर जाकर जागरूकता फैलाने के लिए महिलाओं के साथ बैठक कर प्रचार-प्रसार में जुटी हैं. वे लोगों को अपने सेप्टिक टैंक साफ करवाने के बारे में बताती हैं और ट्रीटमेंट प्लांट के बारे में जानकारी देती हैं. महिलाओं ने बताया कि लोग उन्हें ताना भी मारते हैं और कहते हैं कि वे लैट्रिन प्लांट से आ रही हैं. लोगों को समझाना बहुत मुश्किल होता है.

इस बीच, चिरकुंडा नगर परिषद की प्रशासन प्रियंका कुमारी ने बताया कि प्लांट में शौचालयों के सेप्टिक टैंक के अपशिष्ट से खाद बनाई जाती है. अपशिष्ट को प्लांट तक ले जाने के लिए नगर परिषद की तरफ से गाड़ी भी उपलब्ध है. प्लांट के अंदर कोई प्रदूषण या गंदगी नहीं है. बनी हुई खाद पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल है. यह खाद खेतों की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने में काफी सहायक है.

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