चोरी की तो लगेगा 440 वोल्ट का झटका! पीथमपुर में रेलवे का चोरों के खिलाफ ‘करंट’ वाला मास्टरप्लान

मध्य प्रदेश

इंदौर: आम आदमी ही नहीं देश का पूरा रेलवे महकमा भी चोरों से परेशान है. स्थिति यह है कि जहां भी विद्युतीकरण होता है, वहां महंगी ओवरहेड केबल चोरी न हो जाए, इसलिए विद्युतीकरण कार्य के दौरान एंटी थेफ्ट रिचार्जिंग सिस्टम यानी कि महंगी ओवरहेड केबल में करंट छोड़कर रखा जाता है. जिससे चोर चाह कर भी केवल को न चुरा पाए, इन दिनों ऐसा ही प्रयोग पीथमपुर धार के बीच रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन के दौरान किया जा रहा है.

पटरियों के बाद बिछाई जाती है ओवरहेड केबल

रेल जिस ओवरहेड केबल के जरिए भारी भरकम विद्युत प्रवाह से चलती है, वह विद्युत सप्लाई रेलवे लाइन के ऊपर लगी होने वाली ओवरहेड लाइन के जरिए मिलता है. आमतौर पर जिन इलाकों में रेलवे की नई लाइन डाली जा रही होती है, वहां पटरियां बिछाने के बाद लाइन के विद्युतीकरण के दौरान ओवरहेड केबल भी बिछाई जाती है. ओवरहेड केबल में विद्युत का प्रवाह तेजी से हो सके, इसलिए इसे तांबा और कैडमियम से तैयार किया जाता है, लेकिन बाजार में तांबा और कैडमियम बहुत महंगा बिकने के कारण यह केबल आमतौर पर चोरों के निशाने पर भी रहती है.

वायर व केबल चुराते हैं चोर

हाल ही में रेलवे में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जिसमें चोरों ने सबसे ज्यादा ओएचई वायर और केबल को ही चुराया है. रेलवे ने इस परेशानी से बचने के लिए अब रेलवे लाइनों के विद्युतीकरण के दौरान एंटी थेफ्ट सिस्टम लागू किया है. जिसमें विद्युतीकरण के दौरान जब भी ओएचई वायर क्षेत्र में पहुंचता है, तो उस केबल में न चाहते हुए भी 2.2 किलोवाट का करंट छोड़कर रखा जाता है, जिससे कि काम के दौरान इस वायर अथवा केबल को चोरी होने से बचाया जा सके.

ऐसा करने की स्थिति में काम के दौरान श्रमिक और विद्युतीकरण से संबंधित कर्मचारियों और उसे क्षेत्र में रहने वाले लोगों को भी करंट लगने का खतरा रहता है. इसलिए रेलवे द्वारा बाकायदा इस तरह के करंट से बचने की मुनादी अथवा सार्वजनिक सूचना भी जारी की जाती है. जिससे कि लोग केबल के संपर्क से दूर रह सकें.

चोरों की पसंदीदा सामग्री ओवरहेड लाइन

ओवरहेड केबल तांबा और कैडमियम से तैयार होती है, फिलहाल तांबा बाजार में ₹1000 से लेकर डेढ़ हजार रुपए प्रति किलो बिक रहा है. जबकि कैडमियम की कीमत न्यूनतम ₹2000 किलो है. इसके अलावा केबल में लगने वाला एक जंपर 3000 से लेकर 4000 का है. जबकि छोटे वायरिंग रोल प्रति नग ₹600 से ज्यादा के पड़ते हैं, हालांकि चोर इसे काटने के बाद क्षेत्र के कबाड़ियों को सस्ते दामों पर बेच देते हैं.

झांसी में वायर चोरी, बिहार में केबल काट ले गए थे चोर

हाल ही में झांसी में ऐसा ही मामला सामने आया था. जिसमें लोहा चोरों के पास रेलवे का लाखों का वायर बरामद किया गया था. जिसमें एक ऐसे गिरोह का पता चला जो सिर्फ रेलवे की केबल चोरी करता था. इसके अलावा मध्य प्रदेश के बीना के अलावा बिहार के सोनभद्र में चोर सर्विस लाइन से ही ओवरहेड केबल काट कर ले गए थे. जिसके कारण संबंधित क्षेत्र में रेलवे का ऑपरेशन 19 घंटे तक तक ठप्प रहा.

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry