रांची (झारखंड): राज्य में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से जुड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ अभ्यर्थियों और छात्रों का विरोध प्रदर्शन अनवरत जारी है, तो दूसरी तरफ इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी अत्यंत तेज हो गई है। इस बीच, JPSC के अध्यक्ष (चेयरमैन) तथा अन्य सदस्यों के सामूहिक इस्तीफे के पश्चात यह संवैधानिक संस्था पूरी तरह से क्रियाहीन एवं ठप पड़ गई है, जिसके चलते वर्तमान में कोई भी नीतिगत निर्णय नहीं लिया जा पा रहा है।
📜 14वीं JPSC PT परीक्षा रद्द करने की घोषणा के बाद भी नोटिफिकेशन का इंतजार, JSSC CGL रद्द करने पर अड़े छात्र
आंदोलनकारी परीक्षार्थियों की प्रमुख मांगों को संज्ञान में लेते हुए राज्य सरकार ने 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (PT) तथा वर्ष 2023-2025 की बैकलॉग परीक्षा को निरस्त (रद्द) करने की सहमति दी थी।
किंतु, इस मौखिक निर्णय के कई दिन व्यतीत हो जाने के उपरांत भी अभ्यर्थियों के लिए अब तक कोई आधिकारिक शासकीय सूचना या अधिसूचना निर्गत नहीं की गई है। इसके अतिरिक्त, अभ्यर्थी JSSC CGL परीक्षा के साथ-साथ निजी कंपनी TDPL द्वारा आयोजित कराई गई अन्य सभी परीक्षाओं को भी अविलंब रद्द करने की मांग पर अडिग हैं।
🎯 ‘सरकार कर रही सिर्फ आईवॉश’— बीजेपी प्रवक्ता संदीप वर्मा का राज्य सरकार पर तीखा हमला
छात्रों के निरंतर विरोध को लेकर विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) राज्य सरकार पर लगातार हमलावर है।
बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता संदीप वर्मा ने कहा कि सरकार इस संवेदनशील मामले में केवल ‘आईवॉश’ (दिखावा) करने में व्यस्त है। उन्होंने कहा कि जिस 14वीं JPSC PT परीक्षा को रद्द करने के लिए छात्रों ने भारी आंदोलन किया था और सरकार ने सहमति भी व्यक्त की थी, उसे आज तक औपचारिक रूप से गजट या आदेश के जरिए निरस्त नहीं किया गया है।
🏛️ मुख्यमंत्री खुद बुलाएं कैबिनेट की बैठक, परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच के आदेश जारी करे सरकार
बीजेपी प्रवक्ता ने आगे कहा कि चेयरमैन और सदस्यों के त्यागपत्र के उपरांत JPSC वर्तमान में एक अक्षम संस्था बन चुकी है, जो स्वयं निर्णय लेने की वैधानिक स्थिति में नहीं है।
अतः, मुख्यमंत्री को स्वयं संज्ञान लेकर अविलंब राज्य मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की विशेष बैठक बुलानी चाहिए और अपने विशेषाधिकारों का प्रयोग करते हुए परीक्षा रद्द करने की औपचारिक स्वीकृति प्रदान करनी चाहिए। इसके साथ ही, जिन-जिन प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न उठ रहे हैं, उनकी उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच के आदेश जारी किए जाने चाहिए।
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