चंडीगढ़: हरियाणा में सरकार द्वारा जनसभाओं, धरना-प्रदर्शन और रैलियों पर लगाए गए प्रतिबंध के बाद राज्य की राजनीति में उबाल आ गया है। इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखा है। उन्होंने सरकार से 10 जून को जारी उस आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की है, जिसके तहत सितंबर तक राजनीतिक कार्यक्रमों पर रोक लगा दी गई है।
📜 पत्र में लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर
अभय चौटाला ने चंडीगढ़ स्थित पार्टी कार्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया कि इनेलो संसाधनों की बचत का सम्मान करती है, लेकिन किसी भी नीति का आधार लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक स्वतंत्रता के खिलाफ नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत अभिव्यक्ति की आजादी है, जिसे सरकार द्वारा कुचला नहीं जा सकता।
📢 “जनता की आवाज दबाने का प्रयास”
सरकार पर तीखा निशाना साधते हुए इनेलो नेता ने कहा कि आज प्रदेश की जनता महंगाई, बढ़ती बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं और कानून-व्यवस्था की बदहाली से जूझ रही है। सरकार इन ज्वलंत मुद्दों का समाधान करने के बजाय उन पर प्रतिबंध लगा रही है जो जनता की आवाज उठाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में असहमति जताना और सरकार से जवाब मांगना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, जिसे छीना नहीं जा सकता।”
⚖️ क्या है सरकार का आदेश?
सरकार ने संसाधनों के संरक्षण और अन्य प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए सितंबर तक धरना-प्रदर्शन और रैलियों पर रोक लगाई है। वहीं, विपक्ष इसे जनता की आवाज को दबाने की एक सोची-समझी रणनीति बता रहा है। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस मुद्दे पर अपना स्टैंड बदलती है या यह विवाद और गहराता है।

What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad
