ग्वालियर शहर में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ नगर निगम और जिला प्रशासन की कार्रवाई एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि नगर निगम स्तर पर अवैध कॉलोनियों पर मुख्य कार्रवाई फिलहाल होल्ड पर है, लेकिन राजस्व विभाग और प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए ग्रामीण और शहरी इलाकों में अवैध कालोनियां बसाने वालों के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। शहर के सभी एसडीएम के माध्यम से अवैध कॉलोनियों की जानकारी जुटाकर उनके सर्वे नंबरों को खसरे के कॉलम नंबर 12 में दर्ज कर दिया गया है, जिससे वहां भूखंड खरीदने वाले आम लोग अब नामांतरण और अन्य संपत्तियों के कामों में फंस गए हैं।
📊 कार्रवाई के आंकड़े और खसरे में प्रविष्टि की स्थिति
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, कुल 932 अवैध कॉलोनियों में से निगम स्तर पर बड़ी संख्या में कॉलोनियों पर पूर्ण कार्रवाई अभी शेष है। हालांकि, कुल 379 अवैध कॉलोनियों की जानकारी खसरे के 12 नंबर कॉलम में दर्ज कराने की प्रक्रिया अनुविभागीय अधिकारी स्तर पर पूरी की जा चुकी है। इन सर्वे नंबरों के खसरे में दर्ज होने के बाद तहसीलदार स्तर पर नामांतरण कार्य रुक गए हैं, जिससे इन कॉलोनियों में प्लॉट लेने वाले खरीदार भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं।
⚖️ कलेक्टर के सख्त निर्देश, कॉलोनाइजरों पर दर्ज हो रहे मुकदमे
जिला प्रशासन ने अवैध निर्माण और कालोनियों के विकास पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। पिछले महीनों में बिजौली और आसपास के क्षेत्रों में 17 अवैध कॉलोनियां बसाने वालों पर एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद 29 सितंबर को कलेक्टर ने वैध दस्तावेज प्रस्तुत न करने वाले भूमिस्वामियों और कॉलोनाइजरों के खिलाफ मध्यप्रदेश ग्राम पंचायत राज एवं स्वराज अधिनियम, 1993 के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2016 के नगरीय प्रशासन विभाग के आंकड़ों में ग्वालियर अवैध बसाहटों के मामले में सबसे ऊपर दर्ज किया जा चुका है।
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