Gurugram GRAP Helpline Number: गुरुग्राम में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए नगर निगम ने जारी किया डेडिकेटेड हेल्पलाइन नंबर

हरियाणा

शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण पाने और ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के प्रावधानों की सख्त अनुपालना सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नगर निगम गुरुग्राम (MCG) ने एक नया और महत्वपूर्ण कदम उठाया है. निगम की ओर से एक डेडिकेटेड ग्रेप हेल्पलाइन नंबर 9821395354 जारी किया गया है, जिसकी मदद से अब आम नागरिक ग्रेप के तहत प्रतिबंधित गतिविधियों और नियमों के उल्लंघन से जुड़ी अपनी शिकायतें सीधे इस नंबर पर व्हाट्सएप संदेश (WhatsApp Message) भेजकर अथवा कॉल के माध्यम से आसानी से दर्ज करा सकेंगे. हालांकि, शिकायत दर्ज कराते समय नागरिकों को घटना की फोटो या वीडियो, सही लोकेशन और पूरा एड्रेस स्पष्ट रूप से भेजना होगा, ताकि प्रशासन तुरंत उचित कार्रवाई कर सके.

📱 समीर ऐप और कॉल सेंटर के जरिए भी दर्ज करा सकेंगे शिकायत, प्रशासन ने दिए कई विकल्प

नगर निगम का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से प्रदूषण फैलाने वाली अवैध गतिविधियों की सटीक जानकारी हासिल करना और उन पर त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है. डेडिकेटेड हेल्पलाइन नंबर के अलावा नागरिकों के पास शिकायत दर्ज कराने के लिए कई अन्य माध्यम भी उपलब्ध हैं. नागरिक चाहें तो समीर ऐप (Sameer App), सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, सीएचएस (CHS) पोर्टल या फिर नगर निगम के कॉल सेंटर हेल्पलाइन नंबर 18001801817 के माध्यम से भी अपनी शिकायतें दर्ज करवा सकते हैं. इन डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते समय यदि समस्या और स्थान का स्पष्ट विवरण दिया जाए, तो संबंधित अधिकारियों को मामले की पहचान करने और मौके पर त्वरित कार्रवाई करने में काफी आसानी होती है.

🤝 निगमायुक्त प्रदीप दहिया की नागरिकों से अपील: स्वच्छ हवा के लिए जनसहयोग है बेहद जरूरी

नगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने शहर के सभी नागरिकों से आगे आकर इस अभियान में सहयोग करने की जोरदार अपील की है. निगमायुक्त का कहना है कि वायु प्रदूषण पर पूरी तरह लगाम लगाने और ग्रेप के नियमों का कड़ाई से पालन कराने में जनता की सक्रिय भागीदारी सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि यदि कोई भी नागरिक अपने आसपास ग्रेप नियमों के उल्लंघन से जुड़ी कोई गतिविधि देखता है, तो वह तुरंत निर्धारित हेल्पलाइन नंबर या अन्य माध्यमों से निगम को इसकी सूचना दे. प्रशासनिक प्रयासों के साथ-साथ जनसहयोग मिलने से ही शहर में प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है और सभी को एक साफ-सुथरा तथा बेहतर पर्यावरण मिल सकता है.

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