पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आरटीआई एक्टिविस्ट माणिक गोयल और अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके खिलाफ दर्ज FIR की आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। यह FIR पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की अनुपस्थिति के दौरान सरकारी हेलीकॉप्टर के कथित इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाने के बाद दर्ज की गई थी।
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि यह कोई “पुलिस राज” नहीं है और सवाल उठाने मात्र से इस तरह के मामले नहीं बनने चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि जनता को सरकार से सवाल करने और उसकी आलोचना करने का अधिकार है, जिसे दबाया नहीं जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोग समझदार हैं और उन्हें यह पता है कि क्या सही है और क्या गलत। इस मामले में पंजाब सरकार की ओर से दलील दी गई कि माणिक गोयल की सोशल मीडिया पोस्ट से कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती थी और लोगों को भड़काने की कोशिश की गई। हालांकि, इस पर कोर्ट ने सरकारी वकील को राजनीतिक बहस से दूर रहने की नसीहत दी और कहा कि ऐसे मामलों को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
जानें क्या है पूरा मामला:
याचिका में माणिक गोयल ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर यह सवाल उठाया था कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की गैरमौजूदगी में सरकारी हेलीकॉप्टर का उपयोग कौन कर रहा था। पोस्ट में किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया गया था। इसके बावजूद लुधियाना के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई।न FIR को रद्द करवाने के लिए माणिक गोयल सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट का रुख किया था। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने फिलहाल FIR पर आगे की कार्रवाई रोकते हुए सरकार को नोटिस जारी किया है।
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