नई दिल्ली: “आप सांसद हैं। राजनीति में आने के उपरांत भी आपको अंडों से डर लगता है?”— यह तल्ख टिप्पणी सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा की याचिका पर सुनवाई के दौरान की।
अदालत ने फेसबुक पोस्ट से संबंधित एक मामले में दर्ज एफआईआर (FIR) के विरुद्ध दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए महुआ मोइत्रा को किसी भी प्रकार की राहत प्रदान करने से इनकार कर दिया।
🏛️ स्वतंत्रता सेनानियों का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, खारिज की हमले की आशंका
टीएमसी सांसद को बड़ा झटका देते हुए पीठ ने कहा, “आप सांसद हैं, राजनीति में आने के बावजूद आप अंडों से भयभीत हैं; जबकि हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी छाती पर गोलियां खाई थीं। ऐसी याचिकाएं इस सर्वोच्च अदालत के समक्ष आनी ही नहीं चाहिए।”
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने मोइत्रा की इस आशंका को सिरे से खारिज कर दिया कि पुलिस स्टेशन जाने पर उन पर भीड़ द्वारा अंडे फेंके जा सकते हैं।
📌 क्या है पूरा मामला? फेसबुक पोस्ट और कृष्णानगर कोर्ट के बाहर हंगामे का विवाद
जून माह में सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए दो वीडियो में महुआ मोइत्रा की कथित टिप्पणियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एक स्थानीय नेता की शिकायत पर उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
यह मुकदमा तब दर्ज हुआ जब बीजेपी समर्थक कथित तौर पर कृष्णानगर में एक अदालत के बाहर उन पर अंडे और टमाटर फेंकने के उद्देश्य से जमा हुए थे। पिछले महीने कलकत्ता उच्च न्यायालय ने एफआईआर निरस्त करने की मांग वाली मोइत्रा की याचिका पर उन्हें अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी, तथापि कोर्ट ने उन्हें 14 अगस्त को जांच अधिकारी (IO) के समक्ष प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया था।
⚖️ “क्या सांसद होने के नाते वर्चुअली पेशी चाहिए?”— महुआ के वकील की दलील पर कोर्ट के सवाल
सुप्रीम कोर्ट में महुआ मोइत्रा का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने तर्क दिया कि मात्र एक फेसबुक पोस्ट के कारण उन पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
उन्होंने आग्रह किया कि उनकी मुवक्किल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से जांच अधिकारी के सामने पेश होने की अनुमति दी जाए। इस पर अदालत ने प्रश्न किया, “वर्चुअली क्यों? क्या इसलिए कि आप एक सांसद हैं?” इस पर एडवोकेट शंकरनारायणन ने कहा कि उन्हें भय है कि पुलिस स्टेशन जाने पर उन पर हमला हो सकता है।
📜 हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने का निर्देश, महुआ मोइत्रा ने वापस ली याचिका
सर्वोच्च न्यायालय महुआ मोइत्रा के वकील की दलीलों से सहमत नहीं हुआ और स्पष्ट किया कि कलकत्ता उच्च न्यायालय पूर्व में ही उन्हें जांच एजेंसी के साथ पूर्ण सहयोग करने का निर्देश दे चुका है।
पीठ ने कहा कि यदि आप पेश नहीं हो रहे हैं, तो उच्च न्यायालय के समक्ष इसके परिणामों का सामना करने हेतु तैयार रहें। इस कड़े रुख को देखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता शंकरनारायणन ने याचिका वापस लेने का अनुरोध किया, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने याचिका को वापस ली गई मानकर खारिज कर दिया।
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