कर्नाटक की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है, जहाँ डी.के. शिवकुमार राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर उनकी पांचवीं से सातवीं कक्षा की विज्ञान और अंग्रेजी शिक्षिका पार्वती बेहद गौरवान्वित हैं। शिक्षिका के लिए इससे बड़ा सुखद क्षण क्या होगा कि जिस छात्र को उन्होंने ककहरा सिखाया, आज वही राज्य की बागडोर संभालने जा रहा है।
📊 ‘पढ़ाई में औसत, पर नेतृत्व में अव्वल’
शिक्षिका पार्वती ने याद करते हुए बताया कि डी.के. शिवकुमार स्कूली दिनों में पढ़ाई में एक औसत छात्र थे, लेकिन खेलकूद, वाद-विवाद, भाषण और नाटकों में उनका प्रदर्शन हमेशा शानदार रहता था। उन्होंने कहा, “शिवकुमार बचपन से ही बेहद नटखट और शरारती थे, लेकिन उनमें नेतृत्व क्षमता जन्मजात थी। वह स्कूल के कार्यक्रमों का हमेशा नेतृत्व करते थे और अपनी ऊर्जा तथा आत्मविश्वास के कारण बाकी छात्रों के बीच अलग नजर आते थे।”
🤝 अटूट गुरु-शिष्य का रिश्ता
शिक्षिका और छात्र का यह रिश्ता स्कूल के बाद भी बरकरार रहा। शिक्षिका ने बताया कि शिवकुमार की राजनीति में सक्रियता के दौरान भी उनका संपर्क बना रहा। चाहे वह शिवकुमार की शादी का मौका हो या उनके विधायक बनने के बाद की मुलाकातें, डी.के. शिवकुमार ने हमेशा अपनी शिक्षिका का सम्मान किया। पार्वती ने बताया कि जब उन्होंने खुद का स्कूल शुरू किया, तब भी शिवकुमार ने सरकारी अनुमति दिलाने में उनकी हर संभव मदद की।
💡 शिक्षिका का भावी सीएम को संदेश
राज्य की सत्ता संभालने जा रहे अपने पूर्व छात्र के लिए पार्वती ने एक विशेष संदेश भी दिया है। उन्होंने कहा, “मैं चाहती हूं कि डी.के. शिवकुमार कर्नाटक के युवाओं और स्कूली छात्रों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार लाएं। विशेष रूप से आज की युवा पीढ़ी के बढ़ते ‘स्क्रीन टाइम’ (डिजिटल आदतें) को लेकर उन्हें लचीले और अनुकूल नियम बनाने चाहिए, जो छात्रों के सर्वांगीण विकास में सहायक हों।”
संपादकीय टिप्पणी: एक शिक्षक के लिए अपने छात्र की सफलता से बड़ा कोई पुरस्कार नहीं होता। क्या आपको लगता है कि शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए ऐसे अनुभवी शिक्षकों के सुझावों को नीति-निर्माण का हिस्सा बनाया जाना चाहिए? अपने विचार नीचे साझा करें।
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