इंदौर : इंदौर में डिजिटल अरेस्ट की घटनाएं लगातार हो रही हैं. इसी क्रम में अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र में रहने वाले सीनियर सिटीजन भी ठगों के टारगेट पर आ गए. 81 वर्षीय रिटायर्ड बुजुर्ग को ठगों ने ऑनलाइन तरीके से चपत लगाने का प्रयास किया. सीनियर सिटीजन अपनी 25 लाख की एफडी तुड़वाने के लिए बैंक पहुंचे. उनकी घबराहट देखकर बैंक मैनेजर ने मामले को समझने का प्रयास किया. इसके बाद बैंक मैनेजर ने पुलिस को सूचित कर बुजुर्ग को ठगने से बचा लिया.
आतंकियों को रकम देने का झांसा देकर डराया
एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया “रिटायर्ड बुजुर्ग को अज्ञात नंबर से फोन आया. फोन करने वाले ने खुद को जम्मू-कश्मीर पुलिस का अधिकारी बताया. ठगों ने बुजुर्ग से कहा “आपका एक अकाउंट जम्मू कश्मीर में है. इस अकाउंट से आतंकवादियों को राशि का लेनदेन किया जा रहा है. देशभर की जांच एजेंसियां आपके खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर सकती हैं.” इससे बुजुर्ग काफी घबरा गए. सायबर जालसाजों ने बुजुर्ग को 3 दिन तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा.
ठगों की धमकी से डरे बुजुर्ग एफडी तुड़वाने पहुंचे
सीनियर सिटीजन ने अपनी बेटी को भी इसकी जानकारी दी तो वह भी घबरा गई. इसके बाद बुजुर्ग से ठगों ने 25 लाख रुपए की डिमांड की. बुजुर्ग ने ठगों से कहा “वह बैंक जाकर एफडी तुड़वा रहे हैं.” ठगों ने ये राशि अपने खातों में ट्रांसफर करने की सलाह दी. सीनियर सिटीजन बैंक में एफडी तुड़वाने पहुंचे.
वहां बैंक मैनेजर आलोक देव ने जब बुजुर्ग से एफडी तुड़वाने का कारण पूछा. साथ ही बुजुर्ग की घबराहट देखकर बैंक मैनेजर को शक हुआ. बैंक मैनेजर ने बुजुर्ग की काउंसलिंग की. इस दौरान बुजुर्ग ने पूरा वाकया बता दिया. इसके बाद बैंक मैनेजर ने पुलिस को सूचना दी. इस प्रकार सीनियर सिटीजन को बैंक मैनेजर ने 25 लाख लुटने से बचाया.
बैंक के साथ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज
ईओडब्ल्यू ने एक बैंक अधिकारी की शिकायत पर यशास एफआरपी मैन्युफैक्चरिंग और उसके संचालक संजय गुप्ता और पत्नी शालिनी गुप्ता के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है. ईओडब्ल्यू एसपी रामेश्वर सिंह यादव ने बताया “यशास एफआरपी मैन्युफैक्चरिंग द्वारा बैंक ऑफ़ बड़ौदा से 11.05 करोड रुपए का लोन लिया गया था. लोन को अन्य फर्मों के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया गया. जिस कंपनी के एवज में बैंक लोन लिया गया था, उसकी मशीनों को बिना सूचना दिए बेच दिया.”
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