Gwalior Music Heritage Row: हद्दू खां सभागार से ध्रुपद केंद्र हटाने का प्रस्ताव खारिज; सदन में हुआ जमकर हंगामा

मध्य प्रदेश

ग्वालियर: संगीत नगरी ग्वालियर में स्थित उस्ताद हद्दू खां सभागार और वहां संचालित ध्रुपद केंद्र को लेकर नगर निगम की विशेष बैठक में जमकर हंगामा हुआ। एक पार्षद द्वारा ध्रुपद केंद्र को खाली कराने के लिए लाए गए प्रस्ताव पर सदन दो गुटों में बंट गया। अंततः मतदान के जरिए बहुमत से इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया और संगीत की इस अनमोल धरोहर को बचा लिया गया।

⚔️ सदन में ‘धर्म’ बनाम ‘विरासत’ का टकराव

प्रस्ताव पेश करने वाली कांग्रेस पार्षद सईदा आसिफ अली ने इसे क्षेत्र में पार्क की कमी से जोड़ते हुए अपने धर्म विशेष को लेकर भेदभाव का आरोप लगाया। उन्होंने तर्क दिया कि वहां केवल 4-5 लोग ही आते हैं, इसलिए उस जगह पर गार्डन या सामुदायिक भवन बनना चाहिए। इसके जवाब में बीजेपी पार्षद अपर्णा पाटिल ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह ग्वालियर की संगीत विरासत है, जिसने शहर को विश्वभर में ‘संगीत नगरी’ की पहचान दी है। उन्होंने इस पर अनर्गल धार्मिक बातें न करने की नसीहत दी और विरोध स्वरूप सदन में ही संकल्प पत्र फाड़ दिया।

🗳️ वोटिंग से तय हुआ फैसला

विवाद बढ़ता देख सभापति मनोज सिंह तोमर ने सदन में वोटिंग कराई। इस प्रक्रिया में 19 मत प्रस्ताव को खारिज करने के पक्ष में पड़े, जबकि 6 मत इसके समर्थन में थे। भारी बहुमत से प्रस्ताव निरस्त होने के बाद सभापति ने स्पष्ट किया कि ध्रुपद केंद्र ग्वालियर की विलुप्त होती संगीत कला को संरक्षित करने का कार्य कर रहा है, और ऐसी विरासत के साथ छेड़छाड़ करना कतई उचित नहीं है।

🛡️ क्या है ध्रुपद केंद्र का महत्व?

यह केंद्र ग्वालियर घराने के जनक उस्ताद हद्दू खां के समाधि स्थल पर स्थित है। वर्षों पहले मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग ने इसे नगर निगम के माध्यम से आवंटित कराया था। वर्तमान में यहां चंबल संभाग के कई छात्र ध्रुपद जैसी कठिन और विलुप्त होती संगीत विधा की शिक्षा ले रहे हैं। सभापति के अनुसार, सामुदायिक भवन या गार्डन के लिए शहर में पर्याप्त अन्य स्थान उपलब्ध हैं, अतः ऐतिहासिक धरोहर को नष्ट करने का कोई औचित्य नहीं था।

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