धनबाद: कोयलानगरी धनबाद में कांग्रेस और जिला प्रशासन के बीच विवाद अब सार्वजनिक रूप से सामने आ गया है। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष ने धनबाद अंचलाधिकारी (सीओ) के विरुद्ध धनबाद थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने सीओ पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। सीओ के विरुद्ध शिकायत पत्र देने के बाद मीडिया से बातचीत में जिलाध्यक्ष संतोष सिंह ने कहा कि प्रशासन लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन करने का प्रयास कर रहा है।
🚫 लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन: शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर केस दर्ज करने का विरोध
संतोष सिंह ने कहा कि हाल ही में कांग्रेस कार्यकर्ता स्थानीय समस्याओं को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान प्रशासन ने उनपर सरकारी कार्य में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज करा दिया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह निराधार है। जनता की आवाज उठाने वाले कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित करना प्रशासन की गलत मानसिकता को दर्शाता है। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सरकार को तत्काल कड़े कदम उठाने चाहिए।
🔍 धनबाद अंचल के सीओ पर गंभीर आरोप: भ्रष्टाचार और अभद्र व्यवहार का मामला
कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि संबंधित अंचलाधिकारी भ्रष्टाचार में संलिप्त हैं और उनकी कार्यप्रणाली से सरकार की छवि धूमिल हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले भी अंचलाधिकारी पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ अभद्र व्यवहार, अपमानजनक भाषा के प्रयोग और जाति सूचक टिप्पणी करने के आरोप लग चुके हैं। इन मामलों में भी पूर्व में शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
🚩 कांग्रेस का अल्टीमेटम: प्रशासनिक मनमानी के खिलाफ होगा व्यापक आंदोलन
संतोष सिंह ने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस पार्टी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास करती है, लेकिन प्रशासनिक मनमानी और तानाशाही रवैये को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि लगातार सामने आ रही शिकायतें इस बात का संकेत हैं कि पदाधिकारी अपनी सीमाओं का उल्लंघन कर रहे हैं। यदि पुलिस और उच्चाधिकारियों द्वारा जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो कांग्रेस पार्टी जिले में व्यापक आंदोलन शुरू करेगी।
🔥 गरमाई जिले की राजनीति: प्रशासन के प्रति कांग्रेसियों में भारी रोष
इस घटनाक्रम के बाद धनबाद की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं में प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सत्ताधारी दल के जिला अध्यक्ष द्वारा प्रशासनिक अधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोलने से जिला प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस और जिला प्रशासन इस लिखित शिकायत पर क्या रुख अपनाता है।
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