पलामू: जामताड़ा एनकाउंटर में ढेर कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा का शव पहुंचा पैतृक गांव, बुधवार को होगा अंतिम संस्कार

झारखण्ड

पलामू (झारखंड): झारखंड के पलामू जिले अंतर्गत हुसैनाबाद के ग्राम पथरा स्थित पैतृक आवास पर मंगलवार को कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा का पार्थिव शरीर लाया गया है।

सुजीत सिन्हा का अंतिम संस्कार बुधवार को पैतृक गांव में संपन्न किया जाएगा। गैंगस्टर का शव गांव पहुंचते ही उसे देखने के लिए स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने और सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुलिस प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में ‘हाई अलर्ट’ जारी कर दिया है और गांव में भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है।

🚓 जामताड़ा में पुलिस कस्टडी से भागते समय एनकाउंटर में हुआ था ढेर, चाईबासा जेल में बंद पत्नी पहुंचेगी गांव

उल्लेखनीय है कि साहिबगंज जेल से धनबाद जेल स्थानांतरित करने की प्रक्रिया के दौरान जामताड़ा जिले में सुजीत सिन्हा का पुलिस एनकाउंटर हुआ था।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सुजीत सिन्हा ने पुलिस अभिरक्षा (Custody) से भागने का प्रयास किया था और पुलिस टीम पर फायरिंग की थी, जिसके जवाब में हुई जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया। सुजीत सिन्हा की पत्नी रिया सिन्हा (जो वर्तमान में चाईबासा जेल में बंद है) और उनका अस्वस्थ बेटा बुधवार को पैतृक गांव पहुंचेंगे। हुसैनाबाद थाना प्रभारी चंदन कुमार के नेतृत्व में पुलिस बल मौके पर मुस्तैद है। पथरा पंचायत के मुखिया नरेश पासवान ने बताया कि बुधवार अपराह्न 3 से 4 बजे के मध्य अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

⚠️ पलामू, रांची, रामगढ़ से धनबाद तक फैला था आपराधिक नेटवर्क; अकेले पलामू में दर्ज थे 40 से अधिक मामले

सुजीत सिन्हा झारखंड के संगठित अपराध जगत का एक जाना-माना और खौफनाक चेहरा था।

उसके विरुद्ध पलामू, लातेहार, रामगढ़, हजारीबाग, रांची और धनबाद सहित राज्य के अनेक जिलों में हत्या, रंगदारी, आर्म्स एक्ट और लेवी वसूली के दर्जनों गंभीर मामले दर्ज थे। अकेले पलामू जिले में वर्ष 2005 के बाद से सुजीत सिन्हा पर हत्या एवं रंगदारी के 40 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए थे। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया के तहत वर्ष 2023-24 के दौरान लगभग 15 से अधिक मुकदमों में साक्ष्यों के अभाव में वह बरी भी हो चुका था।

⚔️ वर्ष 2005 में देशी कट्टे के साथ रखा था अपराध की दुनिया में कदम, 2019 में हुई थी उम्रकैद की सजा

सुजीत सिन्हा ने वर्ष 2005 में पहली बार अपराध की दुनिया में कदम रखा था, जब पुलिस ने उसके पास से एक देशी कट्टा बरामद किया था।

उसी दौरान उसने जेल में रहते हुए ही अपनी मैट्रिक (10वीं) की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। वर्ष 2007 में पलामू के मेदिनीनगर में हुए बहुचर्चित टेंडर विवाद में उसने दो सगे भाइयों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस जघन्य हत्याकांड में पलामू कोर्ट ने वर्ष 2019 में सुजीत सिन्हा को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई थी। सुजीत सिन्हा का एक मकान मेदिनीनगर के श्रीराम पथ क्षेत्र में भी स्थित है।

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