नई दिल्ली: अगस्त महीने के प्रारंभ होते ही अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) से आम उपभोक्ताओं और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत भरी खबर आई है।
पिछले महीने जो कच्चा तेल (Crude Oil) अमेरिका-ईरान तनाव के चलते 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने की ओर अग्रसर था और 100 डॉलर का स्तर छू चुका था, वह अब अचानक बड़ी गिरावट का शिकार हुआ है। सोमवार को खाड़ी देशों का ब्रेंट क्रूड घटते हुए लगभग 85 डॉलर और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। वैश्विक बाजार में अचानक आई इस चाल से सभी विश्लेषक हैरान हैं।
📉 कच्चे तेल की कीमतों में 4 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा की बड़ी गिरावट, जानें प्रमुख कारण
सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक 4 डॉलर प्रति बैरल से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई।
रॉयटर्स (Reuters) की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स $4.08 (4.64%) गिरकर $83.85 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड $4.01 (4.74%) टूटकर $80.66 प्रति बैरल पर बंद हुआ। बीते महीने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव तथा ओमान की खाड़ी व होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल टैंकरों पर हुए हमलों के कारण शिपिंग कंपनियों के हटने से तेल की दरों में 20 प्रतिशत से अधिक का उछाल आया था, जिस पर अब लगाम लगी है।
🕊️ क्यों सस्ता हुआ कच्चा तेल? ट्रुथ सोशल पर डोनाल्ड ट्रंप के पोस्ट से घटा तनाव
कच्चे तेल में आई इस अचानक गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कूटनीतिक रुख माना जा रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर नया सैन्य हमला करने के बजाय एक शांतिपूर्ण समझौते (Deal) की पहल की है, जिससे तेहरान के परमाणु कार्यक्रमों पर रोक लगाई जा सके और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही सुरक्षित हो सके। ट्रंप ने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ प्लेटफॉर्म पर जानकारी दी कि ईरान और मध्य पूर्व के देशों ने बातचीत के लिए समय मांगा है, ताकि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस समुद्री मार्ग को सुरक्षित रूप से खोला जा सके। हालांकि, आईजी मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि यदि ईरान ने पुनः किसी टैंकर या अमेरिकी ठिकाने को निशाना बनाया तो यह शांति वार्ता प्रभावित हो सकती है।
🛢️ ओपेक प्लस (OPEC+) का बड़ा फैसला, सितंबर से रोजाना 1,88,000 बैरल बढ़ेगा तेल उत्पादन
कच्चे तेल की नरमी के पीछे दूसरा बड़ा कारण तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक प्लस (OPEC+) का हालिया फैसला है।
रविवार को ओपेक+ ने सितंबर महीने से तेल उत्पादन में प्रतिदिन लगभग 1,88,000 बैरल की बढ़ोतरी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस कदम से पूर्व में स्वेच्छा से की गई उत्पादन कटौती को समाप्त करने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। यद्यपि रूस-यूक्रेन एवं मध्य पूर्व में चल रहे क्षेत्रीय संघर्षों के कारण खाड़ी देशों से निर्यात प्रभावित था, किंतु इस नए फैसले से आपूर्ति चक्र (Supply Chain) में सुधार की उम्मीद जागी है।
⛽ देश में पिछले 70 दिनों से स्थिर हैं पेट्रोल और डीजल के दाम, जानें महानगरों का ताजा हाल
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल में मची हलचल के बीच भारतीय घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की दरें पिछले 70 दिनों (25 मई के बाद) से पूरी तरह स्थिर बनी हुई हैं।
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा 25 मई को की गई मूल्य वृद्धि के बाद से महानगरों में ईंधन दरें इस प्रकार हैं:
-
दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।
-
मुंबई: पेट्रोल ₹111.21 प्रति लीटर और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।
-
कोलकाता व बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110 प्रति लीटर के पार बना हुआ है, जबकि डीजल ₹100 से नीचे है।
-
चेन्नई व हैदराबाद: हैदराबाद में डीजल ₹103.82 प्रति लीटर और चेन्नई में ₹100.92 प्रति लीटर पर बिक रहा है।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad