जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की एकलपीठ ने फीस घोटाला, डुप्लीकेट आईएसबीएन नंबर व अन्य मामलों में आरोपी बनाए गए स्कूल संचालकों, प्रबंधकों, प्राचार्य व पुस्तक विक्रेताओं को राहत देने से इनकार कर दिया है।
कोर्ट ने उक्त लोगों के विरुद्ध दर्ज एफआईआर निरस्त करने से इनकार कर दिया। हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस मामले में कुछ आरोपियों, विशेषकर पुस्तक प्रकाशकों के विरुद्ध जांच लंबित है। हाई कोर्ट ने अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए जबलपुर के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि वे लंबित जांच यथाशीघ्र पूरी करें।
आरोपियों को मिल चुकी जमानत
उल्लेखनीय है कि तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर कई निजी स्कूल के प्राचार्य, संचालक, प्रबंधन कमेटी के सदस्य, बुक पब्लिशर्स, पुस्तक विक्रेताओं के विरुद्ध संबंधित पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज की गई थी। इन पर नियम विरुद्ध स्कूल फीस वृद्धि, डुप्लीकेट आईएसबीएन नंबर वाली पुस्तकों को लागू करने व अन्य अनियमितताओं का आरोप था। अधिकतर आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, लेकिन ट्रायल जारी है।
इनके विरुद्ध दर्ज एफआईआर और ट्रायल को दी गई थी चुनौती
क्राइस्ट चर्च ब्वायज स्कूल की प्राचार्य लूवि मैरी साठे, क्राइस्ट चर्च डायोसीस स्कूल घमापुर की प्राचार्य एकता पीटर्स, बोर्डस्ले स्कूल कटनी के प्राचार्य अतुल अनुपम अब्राहम, चिन्ड्रन बुक डिपो के शशांक श्रीवास्तव, चैतन्य टेक्नो स्कूल के चंद्रशेखर विश्वकर्मा और सूर्य प्रकाश वर्मा ने उनके विरुद्ध दर्ज एफआईआर और ट्रायल को चुनौती दी गई थी। हाई कोर्ट ने सभी की याचिकाएं निरस्त कर दी।
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