Child Trafficking Alert: 5 दिन की नवजात बच्ची को बेचने वाली नर्स और उसका प्रेमी गिरफ्तार, अस्पताल मालकिन फरार; ₹2.60 लाख में हुआ था सौदा

दिल्ली

ग्रेटर नोएडा के बिसरख थाना क्षेत्र में स्थित नवजीवन अस्पताल में नवजात बच्ची की खरीद-फरोख्त के मामले में एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं. मामले में स्वास्थ्य व्यवस्था और अस्पताल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठा रहा है. पुलिस जांच में सामने आया कि अस्पताल संचालिका यशिका गर्ग इसमें मुख्य आरोपी है. इसके कहने पर ही अस्पताल स्टाफ ने बच्ची को बेचने के लिए ग्राहक की तलाश की, जिसमें टेक्नीशियन रणजीत सिंह और सफाई कर्मचारी गजेंद्र भी शामिल था. पुलिस ने दूसरी मुख्य आरोपी नर्स पुष्पा और उसके बॉयफ्रेंड को भी गिरफ्तार किया है. इन दोनों ने ही सौदे में सक्रिय भूमिका निभाई थी. ग्राहक तलाशने से लेकर डील फाइनल करने तक की भूमिका यही लोग निभा रहे थे. 2.60 लाख में इनका सौदा तय हुआ था.

अस्पताल को सील किया गया

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया, जो पूरे केस की गहराई से जांच करेगी. यह कमेटी अस्पताल के रिकॉर्ड डिलीवरी रजिस्टर और मरीजों से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर सच्चाई सामने लाने का काम करेगी. इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि अब तक कितने मामलों में गड़बड़ी हुई है और इससे पहले भी नवजात बच्चियों की खरीद-फरोख्त की गई है या नहीं. हालांकि जांच में यह भी सामने आया कि इस अस्पताल में लिंग परीक्षण का काम भी किया जाता था. स्वास्थ्य विभाग की टीम अब इस मामले पर और गंभीरता से जांच कर रही है. सूत्रों की मानें तो यह लोग एक मल्टीप्ल क्लीनिक खोलकर इस तरह की गतिविधि में शामिल थे.

नवजात बच्ची की असली मां की तलाश

इस मामले में सबसे अहम कड़ी नवजात बच्ची की असली मां है, जिसकी पहचान अभी तक नहीं हो सकी है. पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है. सूत्रों के मुताबिक, जिस युवती ने बच्ची को जन्म दिया है, वह करीब 18 साल की बताई जा रही. हालांकि इसकी सही पहचान और पते की पुष्टि अभी नहीं हो पाई है. पुलिस अस्पताल के रिकॉर्ड, आसपास के इलाकों और संबंधित लोगों से पूछताछ कर इस कड़ी को जोड़ने की कोशिश कर रही है. पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि जैसे ही अस्पताल की संचालिका यशिका गर्ग को गिरफ्तार किया गया, उसके बाद अस्पताल के कुछ कर्मचारी रिकॉर्ड रूम को लॉक कर फरार हो गए. इस वजह से जांच में शुरुआती तौर पर दिक्कत आई, लेकिन अब कमेटी की मौजूदगी में रिकॉर्ड खोले जाने की तैयारी है, जिससे कई अहम राज खुलने की उम्मीद है.

कैसे चलता था ये गैरकानूनी धंधा?

थाना प्रभारी बिसरख कृष्ण गोपाल ने बताया कि पुलिस ने एक आरोपी डॉक्टर को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की है, जिससे कई महत्वपूर्ण जानकारी मिली है. इन जानकारी को अब अस्पताल के दस्तावेजों और रजिस्टर से मिलान किया जाएगा, ताकि मामले को मजबूत बनाया जा सके. CMO की टीम और पुलिस संयुक्त रूप से कम कर रही है, ताकि हर पहलू से साक्ष्य जुटाकर आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार किया जा सके. थाना प्रभारी का यह भी कहना है कि जो भी इस रैकेट में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. साथ ही नवजात बच्ची की असली मां का पता लगाना भी प्राथमिकता है.

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. जिस जगह पर लोगों को सुरक्षित इलाज और भरोसे की उम्मीद होती है, वहीं अगर इस तरह के गैरकानूनी काम हों तो यह बेहद चिंताजनक है. अब देखना होगा कि जांच कमेटी की रिपोर्ट में क्या खुलासे होते हैं और यह पूरा नेटवर्क कितना बड़ा है.

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