मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर : मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान के तहत एमसीबी जिले के स्कूलों में उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए डीईओ आरपी मिरे ने स्कूलों का निरीक्षण किया.अपने निरीक्षण के दौरान आरपी मिरे ने स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही. आरपी मिरे ने बताया कि मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान के तहत जिले के सभी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए काम किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति, पाठ्यक्रम की पूर्णता, और छात्रों के अधिगम स्तर की जांच की जा रही है.
स्कूलों के ग्रेड आधार पर बांटकर तैयारी
आरपी मिरे ने बताया कि स्कूलों को ए, बी, सी, और डी ग्रेड में बांटा गया है.डी ग्रेड वाले स्कूलों में विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि उनकी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो सके. हमारे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भारत सरकार की नई शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान पर विशेष जोर दिया है. इसी मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के 33 जिले में विद्यालयों की ग्रेडिंग की जा रही है.
क्या है मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान
मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान का मकसद शासकीय विद्यालयों में शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाना है. इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सामाजिक अंकेक्षण, शिक्षक प्रशिक्षण, और छात्रों के प्रदर्शन का मूल्यांकन कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, ताकि बच्चों का समग्र विकास हो सके. इस अभियान में स्कूलों का ग्रेडिंग, अभिभावक-शिक्षक सहयोग, और कम प्रदर्शन करने वाले स्कूलों पर विशेष ध्यान दिया जाता है.
मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान के मुख्य बिंदु
- सामाजिक अंकेक्षण : यह अभियान की नींव है, जिसमें स्कूल प्रबंधन समिति, स्थानीय प्रतिनिधि और समुदाय के सदस्य मिलकर स्कूल की शिक्षा की गुणवत्ता की जांच करते हैं.
- शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार: छात्रों की सीखने की क्षमता, शिक्षकों की उपस्थिति और शिक्षण प्रक्रिया का मूल्यांकन होता है.
- शिक्षक प्रशिक्षण: लो ग्रेड वाले शिक्षकों को विशेषज्ञ ट्रेनिंग देते हैं,ताकि वो बेहतर योजना बनाकर छात्रों को पढ़ाएं.
- छात्रों का मूल्यांकन: बच्चों की पढ़ने-लिखने की क्षमता और दूसरे कौशल का परीक्षण किया जाता है.कमजोर छात्रों के लिए अलग से कक्षाएं लगाई जाती हैं.
- ग्रेडिंग प्रणाली: स्कूलों को उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता, सुविधाओं और शिक्षक उपस्थिति के आधार पर ग्रेड दिया जाता है.
- डिजिटल पहल: शिक्षा प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए शिक्षा पोर्टल जैसे डिजिटल उपकरण भी इस्तेमाल किए जाते हैं.
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