बड़ी खबर: टेरर फंडिंग केस में शब्बीर शाह को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत! 7 साल बाद जेल से आएंगे बाहर; कश्मीर की राजनीति में हलचल

हिमांचल प्रदेश

जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को सुप्रीम कोर्ट जमानत मिल गई है. वह आतंकी फंडिंग के आरोप में पिछले 6 सालों से जेल में बंद हैं. जांच एजेंसी NIA ने साल 2017 में इस मामले में केस दर्ज किया था, जांच के बाद शाह को 4 जून 2019 को गिरफ्तार किया गया था. इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहमद शाह को जमानत दे दी है. हालांकि यह जमानत कुछ कड़ी शर्तों के तहत दी गई है.

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने जमानत का यह आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि जमानत कुछ कड़ी शर्तों के साथ दी जा रही है. इससे पहले साल 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट शाह की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था. इसके बाद शब्बीर अहमद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.

हाई कोर्ट ने कहा था कि शाह फिर से ऐसी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं. वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं.इसी फैसले को शाह ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

कैसे मिली शब्बीर अहमद को जमानत?

शब्बीर अहमद पिछले 6 सालों से जेल में बंद हैं, पूरे मामले की जांच NIA की तरफ से की जा रही है. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कुछ बातों पर ध्यान दिया इसी के बाद जमानत दी गई है. कोर्ट ने माना कि शाह काफी लंबे समय से जेल में बंद हैं. इसके साथ ही ट्रायल में कई विसंगतियां और देरी भी सामने आई है. यही वजह है कि अदालत ने उन्हें जमानत देने का फैसला किया.

किन आरोपों में बंद थे शब्बीर

NIA के अनुसार शाह पर आरोप है कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी आंदोलन को बढ़ावा दिया. लोगों को भारत से अलग होने के समर्थन में नारे लगाने के लिए उकसाने का काम भी किया है. इसके साथ ही कई बार मारे गए आतंकवादियों को शहीद बताकर उनकी तारीफ की है.

जम्मू-कश्मीर में हिंसा भड़काने के लिए शब्बीर ने हवाला नेटवर्क के जरिए पैसे लिए हैं. इसके लिए उन्होंने LoC पार व्यापार से फंड जुटाया है. जांच एजेंसी का कहना है कि यह पैसा पत्थरबाजी, सरकारी संपत्ति को नुकसान और भारत के खिलाफ साजिश जैसी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया गया.

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