भिलाई स्टील प्लांट (BSP), जिसे ‘भारत की स्टील सिटी’ के रूप में जाना जाता है, इस समय अपने जेएलएन (JLN) अस्पताल के कथित निजीकरण की खबरों को लेकर चर्चा में है। अस्पताल को निजी हाथों में सौंपे जाने की चर्चा जैसे ही फैली, बीएसपी अनाधिशासी कर्मचारी संघ ने अस्पताल के सामने उग्र प्रदर्शन किया। कर्मचारियों और यूनियन नेताओं का साफ कहना है कि यह अस्पताल हजारों संयंत्र कर्मियों, उनके परिवारों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए एक जीवनरेखा है, जिसका निजीकरण किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
📉 निजीकरण ही विकल्प क्यों? कर्मचारियों ने उठाए सवाल
यूनियन का आरोप है कि बीएसपी प्रबंधन ने पहले भी स्कूलों के निजीकरण के नाम पर कर्मचारियों को महंगी शिक्षा का बोझ दिया है। अब अस्पताल के निजीकरण से स्वास्थ्य सेवाएं महंगी होंगी, जो गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की पहुंच से बाहर हो जाएंगी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अस्पताल की स्थिति बिगड़ने के लिए निजीकरण नहीं, बल्कि प्रबंधन की उदासीनता और पर्याप्त पदों पर भर्तियों का न होना जिम्मेदार है।
👩⚕️ ‘नया स्टाफ भर्ती करें, न कि निजीकरण’
जेएलएन अस्पताल की डॉ. पार्कर ने स्पष्ट किया कि अस्पताल में आधुनिक मशीनें, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और अनुभवी स्टाफ पहले से मौजूद है। उन्होंने कहा कि निजीकरण की जगह अस्पताल की सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए पर्याप्त डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ, नर्सिंग कर्मियों और तकनीकी विशेषज्ञों की तत्काल भर्ती की आवश्यकता है।
📢 बड़े आंदोलन की चेतावनी
यूनियन ने प्रबंधन पर आरोप लगाया कि सेवानिवृत्त हो रहे कर्मचारियों के स्थान पर नए लोगों की नियुक्ति नहीं की गई, जिससे सेवाएं प्रभावित हुई हैं। कर्मचारी संघों ने चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया, तो सभी यूनियनें मिलकर एक व्यापक और उग्र आंदोलन करेंगी, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह प्रबंधन की होगी।
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