भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में नामजद आरोपी बनाए गए तत्कालीन जगदीशपुर SDOP राजेश कुमार शर्मा को नई पोस्टिंग मिल गई है। FIR दर्ज होने के महज सात दिन बाद ही गृह विभाग ने उन्हें पुलिस उपाधीक्षक, मद्य निषेध एवं स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, पटना में तैनात कर दिया है। इस फैसले ने न केवल विपक्षी दलों, बल्कि मृतक के परिजनों को भी हैरान कर दिया है, जो इसे पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवाल मान रहे हैं।
📝 क्या था पूरा मामला और क्यों दर्ज हुई FIR?
17 जून को शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुई पुलिस कार्रवाई में भरत तिवारी की मौत हो गई थी। परिजनों ने इसे ‘फर्जी एनकाउंटर’ बताते हुए पुलिस पर हत्या का आरोप लगाया था। बढ़ते विवाद और जनदबाव के बाद सरकार ने तत्कालीन SDOP राजेश कुमार शर्मा समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। उस समय कार्रवाई करते हुए उन्हें पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय से अटैच कर दिया गया था।
🔄 53 डीएसपी के तबादले में मिली नई जिम्मेदारी
गृह विभाग द्वारा हाल ही में जारी 53 डीएसपी की तबादला सूची में राजेश कुमार शर्मा का नाम शामिल होना चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां एक ओर उन पर हत्या जैसा गंभीर मुकदमा दर्ज है और मामले की जांच जारी है, वहीं उन्हें एक नई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी गई है। जगदीशपुर अनुमंडल की कमान अब पंकज कुमार मिश्रा को सौंपी गई है।
❓ निष्पक्ष जांच पर परिजनों के गंभीर सवाल
भरत तिवारी के परिजनों ने नई पोस्टिंग पर कड़ी नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि जिस अधिकारी पर हत्या का नामजद मुकदमा हो, उसे इतनी जल्दी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना निष्पक्ष जांच की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। परिजनों ने आशंका जताई है कि अधिकारी अपने पद का प्रभाव इस्तेमाल कर जांच को बदल सकते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें अब भी पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है और वे लगातार निष्पक्ष जांच एवं न्याय की मांग कर रहे हैं।
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