Betla National Park News: पलामू टाइगर रिजर्व की अनोखी पहल; अब छात्र सीखेंगे वन्यजीव संरक्षण और आदिवासी संस्कृति

झारखण्ड

पलामू: पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) प्रबंधन ने युवा पीढ़ी को प्रकृति और आदिवासी संस्कृति से जोड़ने के लिए एक अनूठी पहल की है। ‘अन्वेषण’ नाम से शुरू हो रहे इस जंगल कैंप का पहला बैच 29 मई से 31 मई तक बेतला नेशनल पार्क में आयोजित किया जाएगा। इस कैंप का उद्देश्य शहरी और ग्रामीण बच्चों को एक साझा मंच पर लाकर उन्हें प्रकृति के रहस्यों को समझने का मौका देना है। जहां शहरी बच्चे जंगल और आदिवासियों के पारंपरिक जीवन को करीब से देखेंगे, वहीं ग्रामीण बच्चों को नए दृष्टिकोण से रूबरू होने का अवसर मिलेगा।

🎯 जंगल कैंप के मुख्य उद्देश्य और गतिविधियाँ

इस कैंप में 16 वर्ष से अधिक आयु के युवाओं और बच्चों को वन्यजीवों की दुनिया की सैर कराई जाएगी। इसमें भाग लेने वाले प्रतिभागी न केवल बाघ और अन्य जानवरों के व्यवहार को समझेंगे, बल्कि संरक्षण की तकनीकों से भी परिचित होंगे। कैंप में शामिल होने वाली प्रमुख गतिविधियां इस प्रकार हैं:

  • वन्यजीव विशेषज्ञता: वन्यजीवों के पदचिह्नों को पहचानना, कैमरा ट्रैप लगाना और उनके खान-पान (डाइट) को समझना।

  • आदिवासी कौशल: बांस के घर बनाना, पारंपरिक तरीके से आग जलाना और साल के पत्तों से पत्तल बनाना।

  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था: साबुन बनाना, शहद उत्पादन, कंपोस्टिंग और महुआ उत्पादों के निर्माण की जानकारी।

  • सांस्कृतिक संवाद: आदिवासी रहन-सहन और उनके भोजन के साथ-साथ ट्राइबल सोशल और विलेज इकोनॉमी को समझना।

🤝 समाज को जोड़ने की पहल: स्पॉन्सरशिप का अवसर

पलामू टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक प्रजेशकान्त जेना ने बताया कि इस कैंप को टाइगर एस्टीमेशन में मिली सफलता की तर्ज पर डिजाइन किया गया है। पलामू टाइगर रिजर्व में पहली बार हो रहे इस आयोजन के लिए शहरी क्षेत्रों के युवा और बच्चे ग्रामीण इलाके के बच्चों को स्पॉन्सर भी कर सकते हैं, जिससे एक सामाजिक सौहार्द का माहौल बनेगा। यह विजिट न केवल रोमांचकारी होगी, बल्कि भविष्य के संरक्षणवादियों को जंगल के करीब लाने और वन्यजीवों के प्रति उनकी संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए एक शानदार एक्सपोजर साबित होगी।

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